बरसों का जब ख़त्म होता है इंतजार,
जब आता है मेरा प्यार
फिर करती हूँ मैं सोलह श्रृंगार
मन रहता है बेकरार कब हो प्रिय का दीदार
फिर होती है एक आहट खोलती हूँ
मन के द्वार
मेरे दिल में उस दिन आती है
झूम के बहार.........😊😊ऋचा कर्ण✍✍
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