छत्तीसगढ़ की न्यायधानी-संस्कारधानी बिलासपुर के सरकंडा क्षेत्र का एक मोहल्ला बंगालीपारा का दो तल्ला घर जिसमें रहते हैं श्री पवन साहू, सरकंडा के ही एक शासकीय उच्च. विद्यालय में व्याख्याता के पद पर कार्यरत हैं। उनकी आर्थिक स्थिति ठीक है पर फिर भी अतिरिक्त कमाई किसको पसंद नहीं, इसीलिए उन्होंने अपने घर का एक कमरा किराए पर दे रखा है। किराएदार का नाम है राजेश भगत, जो गुरु घासीदास विश्वविद्यालय में वाणिज्य स्नातक की पढ़ाई करता है, अभी वह चौथे सेमेस्टर में है।
उस दिन जब वह अपने विश्वविद्यालय से घर आया तब साहू जी रोज की तरह पौधों को पानी दे रहे थे उसे रोज की अपेक्षा जल्दी आया देख उन्होंने पूछा,
" राजेश आज यूनिवर्सिटी से जल्दी आ गए, पढ़ाई नहीं हुई क्या ? "
" अंकल जी आज यूनिवर्सिटी में साइबर क्राइम की जानकारी देने के लिए एक व्याख्यान का आयोजन किया गया था तो आधे दिन ही पढ़ाई हुई उसके बाद हमारी छुट्टी हो गई। " राजेश अपने जल्दी आने का कारण बताकर अपने कमरे में चला गया।
राजेश के जाने के बाद उनका ध्यान फिर से पौधों को पानी देने में लग गया, तभी उनके फोन बजा। उनका खाता जिस बैंक में था उसका एस.एम.एस. आया था। उसमें कुछ ऐसा लिखा था जिसे पढ़ने के बाद वे सोच में पड़ गए, उन्होंने जो कुछ पढ़ा उस पर उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था।
संदेश में लिखी बात की पुष्टि करने के लिए उन्होंने तुरंत अपने बैंक के मोबाईल बैंकिंग एप पर अपने खाते का बैलेंस देखा, "हाय राम!" उनके मुँह से निकला, " तीन दिन पहले ही तो खाते में पैसे जमा किए थे और आज इतना कम दिखा रहा है! "
इसका कारण जानने के लिए जब उन्होंने खाते का स्टेटमैंट देखा, तो उनका सिर चकराने लगा, हाथों में शक्ति नहीं रही उनके हाथ से मोबाईल छूटकर नीचे गिरा और थोड़े ही क्षण बाद वे भी धड़ाम से अचेत होकर गिर गए। ऐसा क्या देख लिया उन्होंने!
गिरने की आवाज सुन राजेश दौड़ नीचे आया तो देखा कि साहू जी अचेत पड़े हैं। वह उनके पास गया साँस और धड़कन धीमे-धीमे चल रही थी। उसने उन्हें उठाने का प्रयास किया पर दुबले-पतले शरीर के स्वामी राजेश से यह काम नहीं हो पाया ऊपर से घर में भी कोई नहीं था, अब क्या किया जाए। तो उसने पड़ोसियों को बुलाया सहायता के लिए।
सबने मिलकर उन्हें उठाया और उनके कमरे में लेजाकर बिस्तर पर लिटा दिया। तब तक एक पड़ोसी ने अपने पहचान के चिकित्सक को बुला लिया था जो वहीं पास के एक चिकित्सालय में काम करता था। उसने साहू जी का चेकअप करने के बाद होश में लाने के लिए दवाई का एक इंजेक्शन दिया, फिर वे कमरे में मौजूद लोगों से बोले, " चिंता करने की बात नहीं है रक्तचाप बढ़ जाने के कारण ये अचेत हो गए हैं, मैंने इन्हें दवाई दे दी है थोड़े समय बाद ये सचेत हो जाएँगे। "
इंजेक्शन देने के चार-पाँच मिनट बाद उनकी चेतना वापस आई। होश में आने के बाद अपने आसपास पड़ोसियों को और डॉक्टर को देख कर पहले तो उन्हें अचरज हुआ फिर जब याद आया कि वे क्यों बेहोश हुए थे तब वे रोने लगे। रोते-रोते उन्होंने कहा, "यार मैं बर्बाद हो गया; अभी मेरे बैंक का एस.एम.एस. आया था जिसमें लिखा था कि मेरे खाते से तीन लाख रुपए निकाले गए हैं।"
" तब तो हमें तुरंत पुलिस में एफ.आई.आर. दर्ज करानी चाहिए, " उनके एक पड़ोसी ने राय दी।
तो चिकित्सक ने कहा - "आज इनको विश्राम करने दीजिए पुलिस में रिपोर्ट कल लिखवा दीजिएगा।"
चिकित्सक की बात सबको उचित लगी इसीलिए उसी दिन थाने जाने का विचार छोड़ दिया गया। अगले दिन साहू जी अपने एक पड़ोसी मित्र को साथ लेकर सरकंडा पुलिस थाने आ गए अपने साथ हुए अपराध की प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने।
उनका सारा विषय सुनने के बाद थाना प्रभारी ने उनसे कहा, " महोदय आपके साथ साइबर फ्रॉड हुआ है इस प्रकार के मामले हम नहीं साइबर सेल के लोग देखते हैं, इसीलिए मेरी सलाह है आप साइबर सेल में रिपोर्ट लिखवाएँ। इस केस की सारी कार्रवाई वे ही करेंगे। मैं सेल प्रभारी को जानकारी दे देता हूँ वे आपकी सहायता करेंगे।"
साइबर सेल के बारे में साहू जी और उनके पड़ोसी ने आज के पहले कभी कुछ नहीं सुना था तो बिलासपुर में यह कहाँ स्थित है यह कैसे पता होता।
उनकी एसपी के कार्यालय में साइबर सेल के लोग बैठते हैं। आप वहीं जाइए।
सरकंडा के थाना प्रभारी का सुझाव मानकर वे साइबर सेल आ गए अपनी रिपोर्ट लिखवाने। आजकल साइबर फ्रॉड के मामले बहुत बढ़ गए थे इसीलिए यहाँ पहले से ही कुछ लोग अपनी समस्या बताने आए हुए थे तो उनकी बारी आने में लगभग १ घंटे का समय लग गया।
जब सभी लोग अपनी एफ.आई.आर. लिखवा कर चले गए तब ए.एस.आई. रवि महतो ने उन्हें बुलाया, "बताइए श्रीमान आपके साथ क्या हुआ है? "
पवन जी ने सब कुछ शुरू से बताना शुरू किया, " मुझे एक ई-मेल आया था जिसमें म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करने का एक आकर्षक ऑफर दिया हुआ था, उस ईमेल में कम अवधि में अधिक रिटर्न्स देने का दावा किया था और कोई टैक्स भी नहीं लगना था; न ही पेपरवर्क का झंझट था; सबकुछ ऑनलाइन होना था। चूँकि मेल के ईमेल एड्रेस में एक प्रसिद्ध कंपनी का नाम दिया था मैंने टीवी पर इस कंपनी के विज्ञापन देखे थे, इसीलिए इसका भरोसा कर लिया। पर मुझे क्या पता था कि ये सब मेरा पैसा उड़ाने का तिकड़म है………
………. उस मेल में वेबसाइट का एक लिंक था जिस पर मैंने क्लिक किया और फिर उस वेबसाईट में दो हजार रुपए का निवेश किया, पेमेंट के लिए मैंने अपने नेट बैंकिंग का उपयोग किया………
…………. तीन दिन बाद यानि कल मेरे मोबाइल फ़ोन पर शॉर्ट में संदेसा ( एसएमएस ) आया कि मेरे खाते से तीन लाख रुपए निकाल लिए गए हैं और किसी दूसरे की यू.पी.आई. आईडी. में ट्रांसफर हो गए हैं, मेरे खाते का स्टेटमेंट भी यही बता रहा है। सर मैं तो बर्बाद हो गया मैंने वह पैसे अपने बेटे के इलेक्ट्रॉनिक्स के व्यापार में लगाने के लिए बचा कर रखे थे।"
उनकी पूरी बात सुनने के बाद एएसआई महतो ने उनसे कुछ और प्रश्न किए, " पर आपकी नेट बैंकिंग की जानकारी अपराधी तक पहुँची कैसे, एक बात बताइए क्या आपसे कोई सॉफ्टवेयर या मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करवाया था उसने? "
" जी हाँ उसने मुझे एक ईमेल भेजकर एनीडेस्क नाम का एक सॉफ्टवेयर उसने डाऊनलोड करने को कहा था, इसका कारण पूछा तो उसने कहा कि यह आपकी सुविधा के लिए है, निवेश करते समय यदि कोई समस्या आती है तो मैं रिमोट कनेक्शन के द्वारा अपने कार्यालय के कंप्यूटर से आपकी सहायता करूँगा। मैं मूर्ख उसकी बातों में आ गया।"
तो आपको भी एनीडेस्क के माध्यम से लूट लिया गया।
" आपको भी मतलब, क्या और भी लोग हैं जो इस प्रकार ठगी के शिकार हुए हैं? "
जी हाँ साहू जी आजकल अपराधी एनीडेस्क एप इनस्टॉल करवाते हैं फिर इसके माध्यम से अपने शिकार के कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर रिमोट कनेक्शन बना लेते हैं, इसके बाद उनका शिकार अपने कंप्यूटर या स्मार्टफोन पर जो भी टाइप करता है उसे ये लोग रिकॉर्ड कर लेते हैं। इस प्रकार लोगों की संवेदनशील वित्तीय जानकारी जैसे -कि क्रेडिट/डेबिट कार्ड; नेट बैंकिंग की जानकारी; यूजरनेम; पासवर्ड इत्यादि उन तक पहुँच जाती है। कुछ मामलों में अपराधी रिमोट कनेक्शन का लाभ उठाकर पीड़ित के कंप्यूटर या स्मार्टफोन से ही अपने बैंक एकाउंट में पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं…………
…………वैसे ये एनीडेस्क कोई बुरी चीज नहीं है यह बस एक सॉफ्टवेयर है जो स्क्रीन शेयरिंग के काम आता है आईटी जगत में यह एक उपयोगी सॉफ्टवेयर है पर इन साइबर ठगों के कारण यह बदनाम हो गया है………
……… अभी कुछ ही माह पहले हमारे बिलासपुर के ही एक लड़की को कुरियर सर्विस के फर्जी कस्टमर केयर वालों ने लूट लिया, इसी प्रकार सरकंडा के एक व्यक्ति ने गूगल सर्च करके एक वेबसाइट से एसबीआई का हेल्पलाइन नम्बर निकाला पर जिस नम्बर पर उन्होंने बात की वह फर्जी था ठगों ने उनके खाते से एक लाख रुपए निकाल लिए, एक और केस ऑनलाइन डिलीवरी में विलंब होने पर एक लड़की ने गूगल से उस कंपनी का कस्टमर केयर नम्बर पाया जो कि फर्जी था। इन सबमें अपराधियों ने एनीडेस्क का प्रयोग किया था। इन तीनों मामलों में एक और समानता है की सबने गूगल सर्च के माध्यम से कस्टमर केयर का नंबर निकाला था। "
" क्या सभी अपराधी पकड़े गए? "
" जी हाँ, हमने पिछले सप्ताह ही करमाटांड़ जामताड़ा से उन्हें पकड़ा है आपके अपराधी भी पकड़े जाएंगे, चिंता मत करिए।" ए.एस.आई. महतो ने उन्हें विश्वास दिलाते हुए कहा।
साहू जी की रिपोर्ट ए.एस.आई. ने दर्ज कर ली और उन्हें विश्वास दिलाया कि वे चोर को पकड़ लेंगे पर उनके पैसे वापस मिलेंगे या नहीं यह पूछने पर उन्होंने कोई संतोषजनक उत्तर नहीं दिया, देते भी कैसे उन्हें थोड़े ही पता है कि चोरों ने साहू जी के पैसे खर्च किए हैं या नहीं।
हमें आपके कंप्यूटर से डेटा निकलना पड़ेगा उसके बाद हम छानबीन करके पता लगाएँगे कि आपसे ठगी करने वाला कहाँ से ऑपरेट करता है।
उस समय सेल में रिपोर्ट लिखवाने वालों की भीड़ नहीं थी और उसके पास कोई केस पेंडिंग नहीं था तो ए.एस.आई. महतो साहू जी के साथ ही उनके घर चला गया।
साहू जी के घर पर ए.एस.आई महतो अपनी छानबीन शुरू कर चुका था। सबसे पहले उसने कंप्यूटर में एक सॉफ्टवेयर इनस्टॉल किया जो साइबर फोरेंसिक्स में काम आती है। सॉफ्टवेयर ने कंप्यूटर की रिसेंट एक्टिविटी स्क्रीन पर दिख रहा था कि एनिडेस्क का उपयोग हुआ है। इससे स्पष्ट हो गया कि चोर ने रिमोट एक्सेस के माध्यम से पैसे अपने खाते में ट्रांसफर किए हैं। अब इस खाते की जानकारी निकालनी पड़ेगी।
इसके बाद उसने वेब ब्राउज़र की हिस्ट्री निकाली पर उसे कुछ मिला नहीं, क्योंकि कंप्यूटर से सारी ब्राउज़र हिस्ट्री डिलीट हो चुकी थी, हो एकता है कि जब रिमोट कनेक्शन के माध्यम से कंप्यूटर का एक्सेस अपराधी के पास था तब साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से उसने ही ब्राउज़र का पूरा डेटा डिलीट कर दिया होगा।
अब एएसआई महतो का काम बढ़ गया, पहले डिलीट की गई ब्राउज़िंग हिस्ट्री और दूसरी फाइल्स निकालो फिर उस वेबसाइट को ढूँढो; फिर उसका आईपी एड्रेस उसका आईएसपी पता करो, बहुत काम है भाई। पर यह सब काम बाद के हैं पहले उसने साहू जी के कंप्यूटर की डिस्क इमेज अपने एसएसडी पर बना ली जिसमें कंप्यूटर का सारा डेटा कॉपी हो गया।
अब शुरू हुई इन्वेस्टिगेशन, ब्राउज़िंग हिस्ट्री रिकवर करने के लिए साइबर सेल के पास एक सॉफ्टवेयर था जिससे उनका काम सरल हो गया। ब्राउज़िंग हिस्ट्री खंगालने पर उन्हें वह वेबसाईट मिली जिसमें साहू जी ने अपने डेबिट कार्ड के डिटेल्स भरे थे। ये वेबसाईट म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश करने वाली एक लोकप्रिय फर्म की थी जिसे देखकर एकबारगी टीआई भी चकित रह गए।
उनकी इस हालत पर महतो ने पूछा, " क्या हुआ सर आप कुछ चिंतित लग रहे हैं? "
" हाँ, असल में मैंने इसी वेबसाइट के माध्यम से म्यूच्यूअल फंड्स में कुछ पैसे निवेश किए थे, कहीं मेरे साथ भी तो फ्रॉड नहीं हुआ यही सोच कर मैं चिंतित हो गया था। पर ये वेबसाइट फर्जी है, देखो न इसके डोमेन नेम में ".in" है जबकि असली का ".com" होता है और इस वेबसाइट में अनावश्यक अक्षर बहुत हैं।"
"सर इस वेबसाइट की डोमेन स्पूफ़िंग की गई है, मतलब असली लगने वाली यह नकली वेबसाइट है। साइबर क्रिमिनल किसी प्रतिष्ठित बैंक या कंपनी की वेबसाइट से मिलते जुलते नाम रख लेते हैं फिर ठगी को अंजाम देते हैं।"
ए.एस.आई. महतो अब इंटरनेट पर उपलब्ध टूल्स की सहायता से उस वेबसाईट के बारे में पूरी जानकारी निकालने लगा। कंप्यूटर पर काफी समय खपाने के बाद उसे वह मिल गया जो वह खोज रहा था। उसने अपनी खोज टीआई को दिखाते हुए कहा, " सर वेबसाइट जिस वेब सर्वर पर होस्ट हो रही है उसका और उसके आईएसपी का आईपी एड्रेस हमें मिल गया है और दोनों की लोकेशन भी ट्रेस हो गई है। वह नारायणपुर जामताड़ा में है।"
बहुत बढ़िया और ईमेल कहाँ से भेजे जा रहे थे पता चला?
"जी हाँ सर….", दूसरे कंप्यूटर पर बैठे हेड कॉन्स्टेबल ने बताया, " …उसकी लोकेशन भी नारायणपुर जामताड़ा है।"
"मुझे लगा ही था कि यहीं हमारा अपराधी मिलेगा। बहुत बढ़िया काम किया तुम दोनों ने", टीआई ने उनके काम पर उन्हें शाबासी देते हुए कहा। फिर उसने यह सूचना जिले के पुलिस अधीक्षक को भी दे दी।
"एक टीम तैयार करो और कल ही जामताड़ा रवाना हो जाओ।"
"जी सर।"
********************************************
जामताड़ा, पश्चिम बंगाल के सीमा से लगा झारखंड का एक जिला, देश में यह एक और नाम से जाना जाता है फिशिंग ( phishing ) की राजधानी । भारत में होने वाले ८०% साइबर फ्रॉड यहीं से किए जाते हैं। २०१५ से २०१७ के बीच १२ राज्यों की पुलिस यहाँ साइबर फ्रॉड की छानबीन करने आ चुकी है। बिलासपुर पुलिस पहले भी जामताड़ा के करमाटांड़ से अपराधियों को पकड़ने आई थी अब वही लोग नारायणपुर आए हैं।
नारायणपुर पुलिस थाना जामताड़ा,
थाना प्रभारी नगर निरीक्षक दयाशंकर झा लॉकअप में बंद कुछ लड़कों से पूछताछ कर रहे हैं; केस वही है साइबर फ्रॉड, राँची के एक व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हुई थी। ठगों ने उसे बताया कि उसने २५ लाख रुपए का इनाम जीता है जिसे पाने के लिए बैंक खाते के सभी डिटेल्स बताने होंगे, इनाम के लोभ में उस व्यक्ति ने उसे अपनी सारी जानकारी दे दी। एटीएम कार्ड के नंबर के साथ cvv भी बता दिया उसने।
अगले दिन उसे पता चला कि उसका बैंक एकाउंट खाली हो गया है। पुलिस ने छानबीन की तो पता चला फ़ोन कॉल नारायणपुर के वन्य क्षेत्र में कहीं से किया गया है। इतना जानना पर्याप्त नहीं था इसीलिए पुलिस ने जंगल में जाल बिछाया था जिसमें यह चार लड़के फँस गए।
थाने में निरीक्षक दयाशंकर झा उन लड़कों से पूछताछ कर रहे थे।
" हमें बस लोगों को फ़ोन करके उन्हें डराना या लालच देना होता था ताकि वे हमारे जाल में फँस जाएँ, लोग हमारी हर बात मानकर अपनी जानकारी और ओटीपी हमें बता देते थे, यह सारी जानकारी हम एक नोटबुक में लिखकर रखते थे, इसी के पैसे हमें मिलते थे?"
" तुम्हें पैसे कौन देता है उसका नाम बताओ?"
"हम उसका नाम नहीं जानते"
"तो उससे संपर्क कैसे करते हो?"
" हम नहीं करते वह ही हमें फोन करके जंगल में बुलाता था हर बार अलग नंबर होता था। जब हम वहाँ पहुँचते तो पैसे और कुछ सिम पड़े हुए होते थे साथ में एक कागज पर कुछ नाम और उनके फोन नंबर होते थे उसी से हम फ़ोन करते थे।"
पूछताछ गति पकड़ रही थी लड़के डर से ही सही, इंस्पेक्टर झा के हर प्रश्न का उत्तर दे रहे थे तभी एक आरक्षक ने उन्हें आकर सूचित किया, "साहब बिलासपुर पुलिस के कुछ लोग आए हैं आपसे मिलना चाहते हैं। मैंने उन्हें आपके केबिन में भेज दिया है।"
" ठीक है तो तुम इन्हें संभालो "
थाना प्रभारी के केबिन में दो लोग पहले से ही बैठे हुए थे, उन दोनों ने टीआई झा का अभिवादन किया और अपना परिचय दिया, इन दोनों में से एक तो टीआई चंद्राकर थे और दूसरे एसआई जयंत नामदेव। परिचय होने के बाद टीआई चंद्राकर ने अपने केस के बारे में बताना शुरू किया।
दूसरी ओर ए.एस.आई. रवि महतो अपने साथ पाँच कॉन्स्टेबल को लेकर उस जगह पहुँच गए थे जहाँ से नकली वेबसाइट चलाने वाला इंटरनेट का उपयोग कर रहा था। नारायणपुर से जामताड़ा जाने वाली मुख्य सड़क के पास में जंगल के किनारे यह एक साइबर कैफे था, इसी में फोटोकॉपी करने की दुकान भी चलती थी। १.५ जीबी इंटरनेट डेटा प्रतिदिन मिलने वाले जमाने में जहाँ कई साइबर कैफे बंद हो गए वहीं यह साइबर कैफे अब भी चल रहा है यह देख ए.एस.आई महतो को आश्चर्य हुआ। इस कैफे के सामने ही एक छोटा सा होटल था वहीं नाश्ता करते हुए पुलिसवाले कैफ़े पर दृष्टि बनाए हुए थे।
"सर पक्का यही वह जगह है? हेड कॉन्स्टेबल अजीत द्विवेदी ने चाय पीते-पीते ए.एस.आई महतो से प्रश्न किया।
" हाँ द्विवेदी जी यही से हमारा अपराधी ऑपरेट कर रहा है, यहीं के किसी कंप्यूटर को उसने अपनी वेबसाइट चलाने के लिए सर्वर बनाया होगा और ईमेल भी यहीं से भेजा है उसने।"
"तो सर उसे पकड़ेंगे कैसे?"
"यही तो मैं भी सोच रहा हूँ।"
" सर इसमें सोचना क्या है वारंट हमारे पास है तो दुकान खुलते ही अंदर जो भी होगा सबको पकड़ लेंगे और सारे कंप्यूटर जप्त कर लेंगे।"
"नहीं ये तरीका काम नहीं करेगा अपराधी सतर्क हो जाएगा इससे, कुछ और सोचना होगा।"
बातचीत समाप्त कर रवि नाश्ता करने लगा पर उसकी दृष्टि अब भी साइबर कैफे की ओर थी, बीच-बीच में वह अपनी घड़ी देखता जा रहा था, होटल वाले ने उसे बताया था कैफ़े दस बजे खुलता है। दस बजने में कुछ ही मिनट बचे थे, कैफ़े का मालिक आता ही होगा।
दस बजकर दस मिनट पर कैफ़े के शटर खुलने की आवाज से सबका ध्यान उस ओर गया, अंदर भीड़ बढ़े इसके पहले ही सभी पुलिसवाले कैफ़े में घुस गए हालाँकि उनके पास अब भी कोई योजना नहीं थी। सबने रवि की ओर ऐसे देखा मानों पूछ रहे हों अब क्या करना है, रवि ने आँखों के संकेत से उन्हें कंप्यूटर्स पर बैठने को कहा और स्वयं भी एक कंप्यूटर पर इंटरनेट सर्फिंग करते हुए कुछ सोचने लगा।
तभी एएसआई को एक उपाय सुझा वह काउंटर पर बैठे लड़के के पास गया और उससे पूछा, " मैंने सुना है इस शहर में साइबर फ्रॉड बहुत किया जाता है क्या यह सही है?"
उस लड़के ने उसे पहले अच्छी तरह से देखा फिर उसके प्रश्न का उत्तर देने की अपेक्षा उससे ही प्रश्न पूछ दिया, " क्यों, तुम्हें क्यों यह सब जानना है? तुम जिस काम के लिए आए जो वह करो न। कहीं तुम पुलिसवाले या कोई पत्रकार तो नहीं हो?"
" गुस्सा मत हो भाई मैं न तो पुलिस वाला हूँ और न ही कोई पत्रकार, मैं बस अपने एक खास काम के लिए साइबर ठगों को खोज रहा हूँ।"
"मतलब?"
"मतलब ये कि मैंने एक दोस्त को एक लाख रुपए उधार दिए थे पर अब वह लौटा नहीं रहा है मैं चाहता हूँ कि कोई ठग उसे म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश के जरिए करोड़पति बनने का लालच देकर उससे पैसे निकलवाए। अगर कोई यह काम कर देगा तो मैं उसे पचास हजार दूँगा।"
पैसों की बात सुनकर उसके स्वर थोड़े नरम हुए भैया आप सही जगह आए हैं यह काम हमारे यहाँ ही होता है
रवि की चाल सफल रही पचास हजार के लालच में आकर वह उसका काम करने को उत्सुक दिख रहा था। उस लड़के के आगे कहा, " पर इस प्रकार का काम मेरे मालिक करते हैं जो इस समय शहर से बाहर हैं कल मैं उनसे पूछूँगा यदि वे आपका काम करने को तैयार हो जाते हैं तो मैं आपको फ़ोन करके बुला लूँगा। आप अपना नम्बर दीजिए।"
"मैं तो समझ रहा था तुम ही बॉस हो, खैर कोई बात नहीं मेरा नंबर लिखो।"
दोनों ने एक दूसरे से फ़ोन नंबर ले लिए आज की इन्वेस्टिगेशन यहीं तक हो सकती थी इसीलिए रवि कैफ़े के बाहर आ गया, बाहर निकलते समय वह मुस्कुरा रहा था उसका आधा काम हो गया था। एएसआई और बाकी पुलिसकर्मियों के दुकान से जाने के बाद उस लड़के ने अपने मालिक को फ़ोन किया,
"बोलो बबलू "दूसरी ओर के व्यक्ति ने कहा।
" नमस्ते भैया आज एक आदमी आया था, वह चाहता है कि हम उसके किसी परिचित को ठगें और उससे दो लाख रुपए चुरा ले जिसमें से डेढ़ वह रखेगा और पचास हमें देगा।"
आदमी तो ठीक है न कोई लफड़ा तो नहीं है।
मुझे तो ठीक ही लगा भैया।
ठीक है कल उसे बुला लेना।
पचास हजार मिलने की बात से मालिक भी बहुत उत्साहित लग रहा था।
------------------------------------------------------------------------
रवि ने दुकान से जो मोबाइल नंबर लिया था उसकी कॉल रिकार्ड्स निकालने का काम उसने द्विवेदी को दे दिया, उसे लग रहा था कि यदि कैफ़े का मालिक उससे मिलने के लिए माना नहीं तो एक दूसरा रास्ता भी उसे पकड़ने का।
कॉल डिटेल में पता चला कि रवि के जाने के ठीक बाद दुकान से उसने किसी नंबर पर फोन किया था रिकॉर्ड के अनुसार इस नंबर पर कई बार बात होती थी जिस दिन पवन साहू के खाते से रुपए निकाले गए उस दिन भी दोनों की बातचीत हुई। रवि को संदेह होने लगा तो पुलिसवाले इस सिम कंपनी के पास गए और इसका पूरा नाम पता ले लिया।। नम्बर किसी कल्लू के नाम से लिया गया था, जो नारायणपुर का ही निवासी था।
कल्लू को उठा लिया गया । थाने में अच्छी खातिरदारी हुई उसकी तो उसने अपना मुँह खोल दिया। नम्बर उसी ने लिया था पर उसका उपयोग कोई और ही कर रहा था २०,००० रुपए लेकर उसने अपना सिम बेच दिया था। इसके अतिरिक्त और कोई जानकारी नहीं थी कल्लू के पास। यह रास्ता तो बंद हो गया पर एक
अगले दिन ठगी के सूत्रधार को पकड़ने के लिए नारायणपुर और बिलासपुर पुलिस ने कैफ़े को घेर लिया था, सभी जवान यहाँ की दुकानों के ग्राहक बन कर आए थे। पाँच कॉन्स्टेबल दस बजे कैफे खुलते ही अंदर घुस गए थे और इंटरनेट सर्फिंग कर रहे थे पौने ग्यारह के करीब कैफ़े में एक व्यक्ति आया जिसे बबलू ने नमस्कार किया और उसे अंदर के कमरे में ले गया। यह देख कॉन्स्टेबल द्विवेदी ने एएसआई रवि को फ़ोन किया और उसे अपडेट किया।
सर अभी एक आदमी आया है, लगता है यही बॉस है।
ठीक है तुम लोग अपनी पोजीशन पर रहो मैं थोड़ी देर बाद आता हूँ।
ओके सर।
रवि कैफ़े के सामने वाले होटल के अंदर वाले एक कमरे में बैठा नाश्ता कर रहा था तभी उसके फ़ोन की घण्टी बजने लगी। कॉलर की पहचान थी साइबर कैफे।
उधर से बबकु की आवाज सुनाई दी, बड़े भैया हमारे बॉस आ गए हैं आप भी आ जाओ।
ठीक है आता हूँ, कहकर रवि ने फोन रख दिया और नाश्ता करने लगा। दस मिनट बाद वह कैफे के अंदर गया। अंदर सभी कॉन्स्टेबल बबलू हमेशा की तरह अपने काउंटर पर बैठा था रवि के आते ही वह उसे अंदर ले गया। अंदर एक और व्यक्ति बैठा था बबलू ने रवि से उसका परिचय कराया, ये हैं इस साइबर कैफे के मालिक बिट्टू भैया। ठगी का सारा काम यही करते हैं।
परिचय हो जाने के बाद बिट्टू ने अपने कंप्यूटर से ठगी करना शुरू कर दिया। रवि ने अपने ही एक कांस्टेबल का ईमेल एड्रेस उसे बताया जिस पर उसने मेल भेज दिया, कुछ मिनट बाद उसका रिप्लाई आया जिसमें उसने निवेश करने में रुचि दिखाई थी। ठगी यह सारी प्रक्रिया रवि अपने पेन कैमरा में रिकॉर्ड कर रहा था न्यायालय में जब इसे प्रस्तुत करेंगे तो यह ठगों के विरुद्ध ठोस प्रमाण बनेगा।
उधर कॉन्स्टेबल ने बिट्टू ने ईमेल भेजकर उसे जो करने को कहा वह सब उसने किया, इधर रिमोट कनेक्शन का लाभ उठाकर बिट्टू ने पैसे उड़ाने का प्रयास किया, पर ये क्या? ट्रांजेक्शन हुआ ही नहीं। उसने रवि को इस बारे में पूछा तो उसने अपनी जेब से हथकड़ी निकालकर उसके हाथ में पहना दी और कहा, " साइबर फ्रॉड करने के अपराध में तुम्हें हिरासत में लिया जाता है।"
बॉस को समझ नहीं आया कि क्या हुआ तब रवि ने अपना परिचय पत्र निकालकर उसे दिखाया। पुलिस यह शब्द पढ़कर उसके होश ठिकाने नहीं रहे, वह सोचता था कि उसे कोई पकड़ नहीं सकता पर आज वह पुलिस की गिरफ़्त में था।
अपने बॉस को गिरफ्तार हुआ देख बबलू ने सोचा भागने में ही भलाई है पर बाहर बैठे पाँच कॉन्स्टेबल इसके लिए पहले से तैयार थे उन्होंने उसे दुकान से बाहर भागने का अवसर नहीं दिया। दोनों को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस ने कैफ़े के कंप्यूटर्स से हार्ड डिस्क निकाल कर अपने पास रख लिए जाँच में यह सब भी काम आएगा। फिर दोनों को नारायणपुर थाने ले गए जहाँ कागजी कार्रवाई निपटाने के बाद गाड़ी में डालकर पुलिस वाले बिलासपुर के लिए चल दिए।
पवन साहू अपने घर में बैठकर समाचार पढ़ रहे थे बिलासपुर वाले पृष्ठ पर जब वे आए तो उन्होंने देखा उनके साथ जो हुआ है उसका समाचार छपा है।
"बिलासपुर के एक व्यक्ति से की गई साइबर ठगी नारायणपुर जामताड़ा से अपराधी हुए गिरफ्तार।"
समाचार पढ़कर उनके चेहरे पर संतोष के भाव आ गए, पुलिस ने उन्हें फोन करके यह समाचार पहले ही बता दिया था और यह भी कहा था कि उनसे चुराए गए पैसे वे निकलवा लेंगे। अब साहू जी ने तय किया है कि साइबर फ्रॉड के बारे में वे लोगों को जागरूक करेंगे ताकि किसी और के साथ ऐसी घटना न हो।
साइबर क्राइम आजकल बहुत बढ़ गए हैं पर हम सावधान व सतर्क रह कर इससे बच सकते हैं। इसके कुछ बातें हमें ध्यान में रखनी होंगी, जैसे- कि
1⃣ बैंक के कर्मचारी कभी भी फ़ोन करके हमसे हमारे निजी व खातों से संबंधित जानकारी और ओटीपी नहीं माँगते हैं। यदि कोई स्वयं को बैंक का कर्मचारी बताकर आपको डराता है या किसी प्रकार का लालच देता है तो उसकी बातों में न आएं।
2⃣ कोई भी एप हमेशा प्ले स्टोर से ही डाऊनलोड करें।
3⃣ अपना कंप्यूटर या स्मार्टफोन एनिडेस्क या टीम व्यूअर के द्वारा अनजान लोगों के साथ शेयर न करें।
4⃣ नेट बैंकिंग या मोबाइल बैंकिंग का पासवर्ड किसी को न बताएँ।
अभी के लिए इतना ही
केस क्लोज्ड

0 टिप्पणियाँ