कोरोना काल में रक्षाबंधन त्योहार
#रक्षाबंधन



बहनों के बिन कलाई सजायेंगें हम
इस बरस राखी ऐसे मनायेंगे हम ।।

अपनी छुटकी से दूर रह जायेंगे
थोड़े से हम भी मजबूर रह जायेंगे
चाहकर भी उसे ना बुलायेंगे हम
बस इसी गम में चूर रह जायेंगे
झूठी दिल को तसल्ली दिलायेंगे हम
इस बरस राखी ऐसे मनायेंगे हम ।।

बचपने की वो राखी सतायेगी अब
बहनों की याद भी तो रुलायेगी अब
वो लड़ाई झगड़े करें कौन से
अपनी तन्हाई हमको बतायेगी अब
राखी का दिन भी तनहा बितायेंगे हम
इस बरस राखी ऐसे मनायेंगे हम ।।

राखी के उस उपहार का क्या करें?
इस समय की इनकार का क्या करें?
अब समय से समय की शिकायत है ये
भाई बहनों के प्यार का क्या करें
अपनी आॅंखों के आॅंसू छुपायेंगे हम
इस बरस राखी ऐसे मनायेंगे हम ।।

ये गुजिया मिठाई सब बेकार हैं
फीके फीके से अब देखो त्योहार हैं
भाई बहनों का बंधन न टूटे कभी
छोटा-सा ही तो अपना संसार है
होके गमगीन भी मुस्कुरायेंगे हम
इस बरस राखी ऐसे मनायेंगे हम ।।

                       ✍️ दीनदयाल गौर