भोलेनाथ है दयालु उनको सुमिरन करले उनको सुमिरन करले मन में भक्ति भर ले।
फूल पात हैं उनको प्यारे है बे सबसे न्यारे उनके भरे हैं भंडार उनको सुमिरन करले।।
जो कोऊ मन से उनसें मांगे मनसा पूरन होबे  पावे दुख सेंपार उनको सुमिरन करले।
भोले बाबा न्यारे उनकी महिमा न्यारी सब जग के दुख को हरते उनको सुमिरन करले।।


स्वरचित मौलिक प्रकाशित सर्वाधिकार युक्त डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर