आज लिख इतिहास 'स्वर्ण' पन्नों पर,
विजय तिरंगा फहरा दे....
फिर रचेगा इतिहास दूबारा,
विजय का तिलक लगाले....
तू भारत का सपूत 'महान' है,
दिखादे आज देश की आन....
दहाड़ लगादे नाम की अपनी,
और हो मातृभूमि की जय-जयकार.....
सर ऊँचा कर 'फक्र' कर खुद पर,
तूने ही इतिहास रचा है....
आज होगा शाम या हो जाए सवेरा,
हर घर-घर तिरंगा लहरा है....
✍️ विकास कुमार लाभ
मधुबनी(बिहार)

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