सुजाता ने अब तक एक साधारण जिंदगी को जिया है। लेकिन ससुराल को देखकर तो लगता है कि अब वह एक ऐशो आराम का जीवन व्यतीत करेगी। ऐसा नहीं है कि वह अब तक दुखी थी भले ही उसके पिता के पास बहुत अधिक पैसा नहीं था लेकिन वह सुखी थी । एक इंसान की जरूरत की वस्तुएं तो थी उसके पिता के घर हां ये कह सकते हैं की ऐशो आराम की जिंदगी नहीं थी।
इसीलिए उसके जीवन में वह कमी ससुराल आकार पूरी हो गई।  जहां पैसा कई मुसीबतों को दूर करता है वहीं अक्सर ऐसा भी होता है कि पैसा अपने साथ कई मुसीबतें  लेकर भी आता है।

सुजाता ने जब अपनी ससुराल में कदम रखा तो घूंघट होने के कारण उसे ज्यादा तो नहीं लेकिन इतना जरूर पता चल गया था कि उसकी ससुराल वाला घर बहुत ही बड़ा और खूबसूरत है। जब वह कुछ रस्मों को पूरा करके अपने कमरे में गई तो उसकी आंखे खुशी के कारण कुछ नम हो गई । क्यों की जब इंसान को अपनी कल्पनाओं से परे कुछ ज्यादा ही अच्छी चीज मिल जाती है तो कोई भी इंसान भावुक तो हो ही जाता है। 

थोड़ा देर बाद सुजाता के कमरे में उसकी ननद श्रुति आई। श्रुति ने सुजाता को अभी भी थोड़े घूंघट में देखा तो उसने कहा कि भाभी अब आपको यहां घूंघट करने की कोई जरूरत नहीं है। ये घूंघट तो सिर्फ थोड़ी देर के लिए ही था। बस आप सर पे पल्लू रख सकती हैं। और आपको किसी भी चीज की जरूरत हो तो आप मुझे बताना मैं तो आपकी छोटी बहन के ही जैसी हूं। सुजाता को श्रुति का स्वभाव बहुत अच्छा लगा । धीरे धीरे श्रुति और सुजाता में काफी अच्छी दोस्ती भी हो गई। सुजाता श्रुति को अपनी ननद कम और छोटी बहन ही ज्यादा समझने लगी।
कुछ देर बाद जब मनीष कमरे में आया और सुजाता से उसकी बातें हुई तो सुजाता को मनीष का स्वभाव तो  अच्छा लगा लेकिन सुजाता ने गौर किया कि वो सुजाता से आंखे मिलाकर बात नहीं कर पा रहा। सुजाता को लगा की मनीष ने उससे पहली बार बात की है इसलिए शायद थोड़ी झिझक महसूस कर रहा है। 
सुजाता और मनीष की शादी से पहले कोई बात नहीं हुई थी। सुजाता के पिता और छोटे भाई की भी बस थोड़ी बहुत बात ही हुई थी मनीष से। देखने में तो उसमें कोई कमी नजर नहीं आती  है । नापसंद करने वाली जैसी भी  कोई बात नही है उसमें। और जो भी बातें हुई थी उनकी मनीष से उनसे भी उन्हें कुछ जाहिर नहीं हुआ था। 

कभी कभी सुजाता को मनीष का स्वभाव कुछ बच्चो जैसा लगता है। जब वह खुश होता है तो बिल्कुल बच्चों की तरह व्यवहार करता है । और जब उसको किसी बात पर गुस्सा आता है तो घर में सभी लोग कुछ सहम से जाते है। सुजाता ने महसूस किया कि मनीष घर से बाहर या तो जाता ही नहीं है और जाता है तो उसके पिता या श्रुति कोई न कोई उसके साथ जरूर होता है। कभी उसे अकेले सुजाता ने घर से बाहर जाते हुए नहीं देखा। उसको  इतना तो समझ आ ही गया है कि कुछ तो है जो उससे छुपाया जा रहा है।

कुछ दिन बाद सुजाता को पता चला की मनीष रोज ही कुछ दवाई लेता है। उसका मन हुआ कि वो उससे पूछे दवाइयों के बारे में लेकिन उसने कुछ नहीं पूछा। एक दिन मनीष को अपनी मां से बात करते समय किसी बात पर इतना गुस्सा आ गया कि सुजाता तो उसके गुस्से को देख कर बहुत ही डर गई । गुस्से में मनीष अपना आपा ही खो बैठा । इस वक्त उसे कुछ भी होश नहीं है कि वह क्या कर रहा है। गुस्से में उसने अपनी मां से हाथा पाई भी की। सुजाता ये सब देख कर बहुत ही हैरान है । काफ़ी देर बाद जब मनीष शांत हुआ तो श्रुति ने उसे दवा दी उसके बाद कुछ देर के लिए मनीष सोने चला गया।
सुजाता की स्थिति ऐसी है कि वो ना ही तो किसी से कुछ पूछने की हिम्मत कर पा रही है और ना ही कुछ कहने की।श्रुति भी उसकी स्थिति से भली भांति परिचित है मगर वो कहे भी तो क्या अपनी भाभी से। 
आखिर सुजाता ने हिम्मत करके श्रुति से पूछ ही लिया कि आखिर ये सब क्या था ? मुझे कुछ भी समझ नही आ रहा है दीदी। 
श्रुति भी सुजाता की बात सुनकर परेशान सी हो गई उसे खुद भी समझ नही आ रहा कि वो अपनी भाभी को कैसे बताए कि उनका पति एक ऐसी मानसिक बीमारी से ग्रसित है कि गुस्सा आने पर उसके सर पर एक पागल पन सा हावी हो जाता है। फिर उसको रोक पाना बहुत ही मुश्किल होता है। उसे होश ही नहीं रहता कि वो क्या कर रहा है। हिम्मत तो नहीं हो रही है उसकी लेकिन आखिर कब तक वो अपने भाई की असलियत को भाभी से छुपा पाएगी। अपने पति के बारे में सब कुछ जानने का एक पत्नी को पूरा अधिकार है। ये सारी बातें सोचकर श्रुति ने सुजाता को सब कुछ बता दिया।

सुजाता अपने पति के बारे में ये सब जानकर जैसे एक पत्थर की मूर्ति ही बन गई। उसकी आंखों में आसूं तो हैं लेकिन उसके होठों पर कोई भी प्रश्न नहीं हैं । उसने श्रुति से एक बार भी ये नहीं पूछा कि उन लोगों ने जान पूछकर उसकी शादी ऐसे इंसान से क्यूं कराई ? जो गुस्से में किसी की जान तक लेने पर आतुर हो जाता है, और इस बात की उसे कुछ खबर भी नहीं रहती। सुजाता श्रुति की बातें सुनकर बिना कुछ बोले अपने कमरे में चली गई। 

जिस दिन से उसकी शादी मनीष के साथ तय हुई थी उस दिन से लेके आज तक के सारे भ्रम एक एक करके उसके सामने टूट कर बिखरने लगे हैं। जिसको वो अपना सौभाग्य समझके फूली नहीं समा रही थी वास्तव में वो उसका दुर्भाग्य था। जो आज उसके सामने अपनी वास्तविकता के साथ खड़ा हुआ है। और वो चाहकर भी कुछ नहीं कर सकती । आज सुजाता ये सब देखकर भीतर ही भीतर टूट चुकी है।
एक एक बात का मतलब उसे आज समझ आने लगा है। क्यों उसके ससुराल वालों ने इतना पैसा होते हुए भी गांव के एक साधारण परिवार से रिश्ता जोड़ा ? वो भी एक कम पढ़ी लिखी लड़की के साथ। क्यों उनको शादी की इतनी जल्दी थी कि तीन महीने भी शादी को नहीं रोका ? जबकि जल्दी तो ज्यादातर लड़की वालों को होती है। और शादी में भी क्यूं श्रुति हर वक्त मनीष के साथ साथ थी ? एक पल के लिए भी वो अपने भाई से अलग नहीं हुई। कई बार उसने मनीष के कान में पता नहीं क्या कहा था ?
इतने सारे प्रश्नों का बस एक ही जवाब था कि उसकी जिंदगी शुरू होने से पहले ही खत्म हो चुकी है । उसे अब किसी और से कुछ भी जानने की जरूरत ही नहीं लगी।

क्रमश: अगले भाग में.....

कविता गौतम✍️