गुरु बन गए शिक्षक शिक्षक बने शिक्षामित्रl
अब व्यवसाय हो गया जो था परम पवित्र।।
 मित्र बने शिक्षा दिए बने
 दुकानदार।
ग्राहक उनके छात्र  आदर करना दूर है कहते अरे यार।।
मर्यादा ,गरिमा घटी घटा मान सम्मान सार्वजनिक होने लगा शिक्षक का अपमान।
 पढ़े पढ़ाए मुफ्त में मूरख कहते लोग धन के लेनदेन से करते सब सम्मान।।
गुरु गरिमा कैसे बढ़े मिलकर करो सुयोग आत्मज्ञान सबको मिले ऐसा बने संयोग।
स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉक्टर आशा श्रीवास्तव जबलपुर