नारी हूँ मैं,
स्वतन्त्र हूँ मैं घर के लिए सुख का मंत्र
जीवन को संजोने वाली यंत्र हूँ मैं
अनसुलझे हुए रिश्तो को सुलझाती
हर तरह से परिपूर्ण हूँ मैं........
माँ का मान, पिता का सम्मान हूँ मैं
भाई बहनों के लिए ठंडी पेड़ की छांव हूँ मैं
तु अगर देगा इज्जत
माँ ,बहन ,बेटी ,दोस्त की तरह
तो ममता की प्याली हूँ मैं. .....
मुझसे ही जन्म लेकर
मुझे ही दिखाता औकात मेरी
मत भूल की माँ हूँ मैं.......
किसी की नहीं, खुद की हूँ मैं
इस धरा पर अपने हिस्से का आसमां हूँ मैं
सुन...... नारी हूँ मैं, बेचारी नहीं l

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