बिन तेरे है सब पतझड़.....।
तुम हो तो मन में फूल खिले,
जो ना हो तुम तो पत्ते गिरे.....।
तेरे स्नेह समर्पण से मैं सिंचित होती रहती हूँ,
जो दूर जाते हो तुम मुझसे मैं पतझड़ सी हो जाती हूँ....।
ना जाओ अब परदेश प्रिये ,
पतझड़ आने वाला है..........।
🍂🍂🍁🍁ऋचा कर्ण✍✍

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