तुम महफूज़ हो सदा के लिए
बनकर छतरी तुम्हारे सिर पर तुम्हें
जमाने की कड़ी धूप से बचाऊंगी
संघर्षो की तपन से थकने लगोगे तब
तुम्हें शीतल पवन में ले जाऊंगी
जलती हुई रेत से छाले न पड़ें
अपनी ममता के फूल बरसाऊंगी
तुम्हें दे सकूं हर सुख सुविधा इसलिए
अपने आपको संघर्ष में जलाऊंगी
झेल लूंगी हर कष्ट हर तकलीफ
पर तुम पर कभी आंच न आने दूंगी
तुम मेरे कोख के अंश हो मेरे बच्चों
तुम्हें मैं अपना भविष्य बनाऊंगी
संगीता शर्मा "प्रिया"


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