आज कल कुछ तकलीफो से गुजर रहा है वक़्त,....... 
हर सुबह जगती हू  तो एक  कंपन सा महसूस करती हूँ
काम कुछ हो नहीं पाता थोड़ा थोड़ा सर भी है चकराता
महसूस कर रही हूँ, कुछ घातक घट रहा  है, 
हर एक अंग अंग दुख रहा है, 
बिस्तर पर लेटे लेटे मन घबराता...... 
खाना ठीक से खाया नही जाता...... 
हॉस्पिटल तक भी  जाया नहीं जाता
रात निष्ठुर सी लगती दीन बीते नही बीतता, 
किताबें भी पढ़ी, हंसी ठिठोली भी की 
पर मन को कुछ नहीं भाता........., 
क्या करू  कुछ समझ नहीं आता....,.... 
आज कल वक़्त कुछ तकलीफो से गुजर रहा है वक़्त l