वह कौन चित्रकार है
सुबह उदयाचल से सुन्दर रंग बिखेरता
तो संध्या अस्तंगत किरणों से
कभी पृथ्वी के उस छोर से
कभी समुद्र के उस किनारे से 
तो कभी पर्वतों के पीछे छिपती जा रही
सुनहरी किरणों का 
दिग्दिगन्त में रंग भर देता

वह कौन चित्रकार है जो
उत्तुंग पर्वत श्रृंखलाओं को
श्वेताभ कर अनोखी छटा बिखेर देता

वह कौन चित्रकार है जो 
धवल चांदनी की चादर 
धरती के सिर पर डाल देता

वह कौन चित्रकार है जो
ऋतु परिवर्तन के साथ
अवनी से अम्बर तक 
सात रंगों के पुष्पों की  वर्षा कर
स्वर्ग सी अनुपम छटा 
चतुर्दिक बिखरा देता

वह कौन चित्रकार है
जिसके अलौकिक प्रतिबिंब को
हर चित्रकार   अपनी रचना में
प्रतिस्थापित कर आकाश छूना चाहता

वह तो दिव्य चित्रकार है
जो अम्बर में बैठ, हर पल
धरती पर चित्र- विचित्र
चित्र चित्रित करता रहता
और हर कोई उसके चित्र देख
चित्रखचित सा रह जाता

रेनु सिंह