चल वहां जाते है
एक जहां ऐसा हो
अपने हों सब वहां
कोई पराया न हो।
सपने सच हों वहां
और मंजिल भी हों
पहुंचने की किसी को
जल्दी न हो।
चल वहां जाते है
एक जहां ऐसा हो
प्यार तो हो वहां
कोई नफरत न हो
दुश्मनी की न कोई
जरूरत ही हो।
इंसान हो वहां
अभिमान न हो
ऊंच और नीच का
भेद भाव न हो।
चल वहां जाते है
एक जहां ऐसा हो
बंधन हो प्यार का
जंजीरे न हों
चेहरे पर किसी के
मुखौटे न हो
रिश्ते हो जहां
कोई ढोंग न हो
कोई धोखा न हो
कोई फरेब न हो।
चल वहां जाते है
एक जहां ऐसा हो ।।
स्वरचित/मौलिक/
कविता गौतम✍️

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