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देखते ही देखते राह तेरी परदेशी
बीत गया कब बहार सावन का पता न चला
इस तरह बहार में भी तड़पाता रहा ज़ालिम
क्या हाल होगा अब तो पतझड़ आने वाला है...!!

क्या क्या जतन करू मैं तुम्हे बुलाने का
कोई असर नहीं होता क्या मेरी चाहत का
इस तरह बहकी मौसम में भी तरसाता रहा ज़ालिम
क्या हाल होगा अब तो पतझड़ आने वाला है....!!

जलती है साँसे देख ऊन छायी काली बादलो के
चुभने लगी है बुँदे ये बरसती इन बारिशो के
इस तरह बारिश में भी प्यासी रह गयीं धड़कन ओ बेदर्दी 
क्या हाल होगा अब तो पतझड़ आने वाला है.....!!

समझ जाओ हाले दिल मेरी हर एक जतन करती हूँ
पढ़ लिया करना बेचैनी मेरी हवाओ पे तेरा नाम लिखती हूँ
इस तरह खबर न हुआ जो मेरी दीवानगी का सनम 
क्या हाल होगा अब तो पतझड़ आने वाला है

इस तरह इंतज़ार में तेरी खामोश होगयी जुबाँ
बीत रही पल जैसे सदियों सा पर तेरी इंतज़ार का सिलसिला खतम न हुआ
इस तरह मुस्कुराना भी भूल गयीं गर नैना बहार में भी
क्या हाल होगा अब तो पतझड़ आने वाला है....!!
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नैना.... ✍️✍️