रघु कोटेदार, रौबदार मूंछों पर हाथ फेरते बैठा था ,पास में नन्हे राशन तौल कर सबको बांट रहा था।
मंगला काकी और शीला लाइन में लग गईं।
तभी प्रधान जी की गाड़ी रुकी ,कुछ लोगों के साथ प्रधान जी भी उतरे ,रघु भाग कर उनके सामने हाथ जोड़े खड़ा हो गया,_और बाबू साहिब,कैसे तकलीफ की ,हमको बुला लेते।
अरे इधर से गुजर रहा था ,याद आया प्रधानिन ने कहा था कि चीनी लाना है।
तो सुनो रघु 60 किलो चीनी पहुंचा देना ,लल्ला का मुंडन है।
अरे काहे नहीं ,जरूर जरूर_दांत निपोरते रघु ने कहा।
उसके बाद लाव लश्कर सहित प्रधान जी चले गए।
रघु अंदर गया ,और नन्हे के कान में कुछ फुसफुसाया।
नन्हे दुकान से बाहर आ कर चिल्लाया ,सुनो भाइयों अब एक घंटे बाद दुकान खुलेगी ,थोड़ा खाना खा आएं।
लोगों में खलबली मच गई ,लोग चिल्लाने लगे ,अरे अभी तो दुकान खोला था ,अभी बंद।
लेकिन रघु को इससे क्या ,दुकान का शटर डाउन।
मंगला काकी,शीला से बोली ,अब बिटिया मिल चुका राशन!! उम्मीद न ही करो।
पिछले महीने बीडीओ के लड़के का जन्म दिन था ,तो चीनी की जगह गेहूं मिला था।
गरीबों के हिस्से का अनाज या तो ये घट तौली करके बेच देंगे या फिर किसी रसूखदार के घर राशन चला जाएगा।
उधर अंदर रघु ,नन्हे के साथ मैनेज मैनेज खेल खेल रहा था। 60 किलो प्रधान जी के लिए ,40 में से 10 किलो थाने के दरोगा जी के लिए।
30 किलो चीनी के बोरे में पानी डलवाकर गीला करवाया ,और फिर से दुकान का शटर उठाकर कर राशन वितरण का उत्सव शुरू कर दिया।
15 लोगों को बमुश्किल 2 ,2,किलो चीनी बांट ,दुकान के आगे नन्हे ने तख्ती टांग दी_
चीनी खत्म.......।
खेला तो हो चुका था।जिसे सिर्फ चीनी लेनी थी वो अपना झोला लेकर जिस रास्ते आए ,उसी रास्ते वापस लौट गए।
समाप्त

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