हरि अनंत हरि कथा अनंता 
दुखियों के दुख दर्द सब हरता
जो कोई शरण तुम्हारी आता 
खाली हाथ ना उसे लौटता

कर में पद्म ,गदा ,शंख 
सुदर्शन चक्र विराज रहें
 मस्तक चन्दन गले में 
वैजयंती माला साज रहें

 कृष्ण बने अर्जुन के सारथी
 विराट रूप गीता का ज्ञान दिया 
राम बन सीता संग वनवास गए 
तारी अहिल्या रावण वध किया

नरसिंग बन हिरण्यकशिपु 
 मार भक्त प्रहलाद बचाएं 
ले वराह अवतार ढूंढी पृथ्वी
हिरण्याक्ष मारा देव बचाएं  

जब जब धरा पापियों से 
दूषित हो हाहाकार मचा
तब तब ले अवतार तूने 
पापियों का संहार किया ।।
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश