राज ! नाम तो आपलोगो ने सुना ही होगा । अब आपलोग यह बिल्कुल ना समझे कि यह फिल्मों वाला राज है । जी नहीं यह वह राज नही है । यह मेरी कहानी गलती या गुनाह का प्रमुख किरदार हैं और पूरी कहानी इसी के इर्द- गिर्द घूमती भी है । इस कहानी की शुरुआत होती है राज नाम के ऐसे लड़के से जो डेढ़ साल की छोटी सी उम्र से ही अपने चाचा-चाची और उनके चार बच्चों के साथ रहता था । अब आप सभी के मन में यह सवाल होगा कि डेढ़ साल का इतना छोटा-सा बच्चा अपने चाचा- चाची के साथ क्यूं रहता है ??? आप सब ने यह भी सोच लिया होगा कि इसके मम्मी - पापा इस दुनिया में नहीं होंगे इसलिए यह अपने चाचा-चाची के साथ रहता है लेकिन आपका ऐसा सोचना एकदम से सही नही है । राज जब अपने चाचा-चाची के पास रहने के लिए लाया गया उसकी उम्र महज डेढ़ साल थी । डेढ़ साल में ही उसे अपने मम्मी - पापा से अलग इसलिए रहना पड़ रहा था कि उसके पापा एक हादसे का शिकार हो गए थे और सत्तर फीसदी जलने के कारण उस समय हाॅस्पिटल में भर्ती थे । एक डेढ़ साल का बच्चा अधिकांश अपनी मम्मी के पास ही रहता है और वह भी अपने मम्मी - पापा के साथ हाॅस्पिटल में था । पत्नी होने के कारण राज की मम्मी को हाॅस्पिटल में रहना था और छोटे बच्चे का अपनी मम्मी के साथ ज्यादा लगाव रहता है । कई बच्चें तो ऐसे होते हैं कि अपनी मम्मी का साथ छोड़ते ही नहीं है वह हर समय अपनी मम्मी के साथ ही रहना चाहते हैं । राज भी कुछ इसी प्रकार का बच्चा था ।जब भी वह अपनी मम्मी को नहीं देखता था रोने लगता था ।
उसके चाचा और बड़े भैया ( चाचा के बड़े बेटे ) जो फौज में थे जब उन्हें इस घटना की सूचना मिली वे दोनों हाॅस्पिटल पहुॅंचे तब जरूरी बातों के साथ डाॅक्टर ने कहा कि इस बच्चें( राज ) का हाॅस्पिटल में रहना ठीक नहीं है क्योंकि बच्चों को जल्दी ही संक्रमण हो जाता है इसलिए इस बच्चें ( राज ) को आपलोग अपने साथ घर लेकर जाएं। किसी छोटे बच्चे को अपनी माॅं से अलग रखना सबसे बड़ी परेशानी की बात होती हैं । राज को लेकर जाने पर इसी प्रकार की समस्या का सामना करना था । समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह कदम उठाना जरूरी था और यह कदम उठाया भी गया । इसमें राज की चाची और बड़े भाई - बहनों को बहुत परेशानी भी उठानी पड़ी लेकिन सबने मिलकर डेढ़ साल के राज को संभाल लिया । राज के पापा एक साल तक अलग - अलग हाॅस्पिटल में रहें लेकिन एक दिन ऐसा भी आया जब वह सबको छोड़कर इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा हो गए । राज की उम्र ढाई साल थी जब उसके पापा गुजर गए । राज से बड़े दो भाई - बहन और थे जो कभी अपनी नानी तो कभी दादी के साथ गाॅंव में रहते थे । राज तो अपने चाचा-चाची के साथ रह ही रहा था अब वह हमेशा के लिए शहर में अपने चाचा-चाची के साथ रहने लगा ।
धीरे-धीरे समय बीतता गया। चाचा-चाची के बच्चों की शादियां हो गई थी और उनके बच्चें भी हो गए थे । राज अब नौवीं क्लास में आ गया था । बड़े भैया ( चाचा-चाची के बड़े बेटे ) अपनी पत्नी और बच्चों के साथ बाहर ( जहाॅं उनकी पोस्टिंग थी ) ही रहते थे । शहर वालें घर में चाचा-चाची , चाचा-चाची के छोटे बेटे और राज ही रहता था । चाचा - चाची की दोनों बेटियों की शादी हो चुकी थी ।
राज के चाचा जो हाई स्कूल के टीचर थे अब वह भी रिटायर होकर घर पर ही रहते थे । वह अपनी बीमारी के कारण हर काम के लिए दूसरों पर ही निर्भर थे । राज ही उनका अधिकांश काम करता था ।अब राज चौदह साल का हो गया था और नौवीं क्लास में पढता था । राज के चाचा को अपने बेटों से ज्यादा राज पर विश्वास था शायद इसीलिए उन्होंने कभी भी राज से कुछ नहीं छुपाया था । घर में कौन सी चीज कहाॅं है सबके साथ राज को भी पता था ।
एक दिन उसके चाचा ने घर खर्च और चाची के इलाज करवाने के लिए अपने छोटे बेटे को ए.टी.एम. कार्ड देकर बीस हजार रूपए निकालने को कहा । जब उनका छोटा बेटा पैसे निकालने गया तो पैसे नहीं निकलें । उसने मोबाइल से अपने पापा को बताया कि पैसे नही निकल रहे हैं । राज के चाचा ने कहा कि मिनी स्टेटमेंट निकाल कर लाओं देखते हैं क्या कारण है कि पैसे नही निकल रहे हैं । ऐसा तो पहले नहीं हुआ था इसलिए वह परेशान हो गए । जब मिनी स्टेटमेंट निकाल कर लाया गया और राज के चाचा ने देखा कि ए. टी. एम. में तो बस पाॅंच सौ ही बचे हुए है जबकि उसमें पहले से इक्कीस हजार रुपए थे । राज के चाचा एकदम से घबरा गए और अपने बड़े बेटे को फोन लगाया और सारी बातें बताई । बड़े बेटे ने कहा कि आप मिनी स्टेटमेंट में देखिए कि किस डेट को कितने पैसे निकले है । जब डेट का पता चला तो सबने याद करने की कोशिश की और सबको याद आया कि उस दिन राज की चाची अपने छोटे बेटे के साथ डाॅक्टर के पास गई थी और राज का बड़ा भाई उसी दिन वहाॅं पर आया हुआ था । सबको यही शक था कि राज के बड़े भाई ने यह सब किया है । उसी ने पहले तो ए.टी.एम. कार्ड लिया होगा जो ऐसे ही गद्दे के नीचे रखी रहती थी । उसके बाद पिन नंबर
देख लिया होगा जो कि उसके चाचा ने अपनी डायरी में लिख रखा था । मौका मिलते ही पैसे निकाल लिए होंगे और ए.टी. एम. को उसके जगह पर रख दिया होगा और मोबाइल में आया मैसेज डिलीट कर दिया होगा । सबने यह भी सोचा कि उस दिन राज तो घर पर ही था फिर उसके बड़े भाई ने ऐसा कैसे किया जिसकी जानकारी राज को नहीं हुई । सबके मन में बस यही सवाल था कि यह कब हुआ , कैसे हुआ क्योंकि राज के बड़े भाई पर सबको बस शक था । शक करने का कारण बस यही था कि ए.टी.एम. अपनी जगह पर ही रखा हुआ था । यह सब देखकर यह तो तय था कि घर के ही किसी सदस्य ने इस कांड को अंजाम दिया है लेकिन वह कौन हो सकता है ??यह पता नहीं चल रहा था । संयोग से दो दिन बाद ही राज के बड़े भैया ( चाचा के बड़े बेटे ) छुट्टी में घर आने वाले थे । तय यही हुआ कि उनके आने के बाद ही इसका पता लगाया जाएगा कि बीस हजार पाॅंच सौ रुपए किसने निकाले??
जब राज के बड़े भैया ( चाचा के बड़े बेटे ) एक महीने की छुट्टी में घर आएं । उन्होंने अपने पिताजी के मोबाइल में मैसेज बाॅक्स खोला और पैसे निकाले जाने वाले मैसेज को ढूॅंढने लगे । मिनी स्टेटमेंट में पैसे निकालने के दिन को देखकर उसके बड़े भैया ने उस दिन के सारे मैसेज देखे लेकिन वह मैसेज नहीं मिला जिससे उन्हें पता चल सके कि उस तारीख को पैसे निकालने का मैसेज मोबाइल पर आया था। परिवार के सभी सदस्यों जिसमें राज भी शामिल था को एक जगह बुलाया गया और सबसे बारी - बारी से पूछताछ की गई कि उस दिन कौन कहाॅं था??
राज ने भी बताया कि उस दिन वह कहाॅं गया था और कब घर आया?? । सबसे पूछताछ कर ली गई लेकिन अभी भी कुछ पता नहीं चल पाया था । राज के चाचा- चाची और उनके बच्चों को शक था कि राज का बड़ा भाई जो उस दिन घर आया था से भी पूछताछ की जानी चाहिए क्योंकि उस दिन और कोई भी दूसरा नहीं आया था ।
राज के बड़े भैया ने राज से कहा सबसे पूछताछ हों चुकी हैं लेकिन अभी तक पता नहीं चल पाया है कि किसने पैसे निकाले ?? तुम अपने भाई को फोन करो और उसे गाॅंव से यहाॅं तुरंत बुलाओ ताकि हमलोग उससे भी पूछ लें और उसके बाद हम पुलिस में रिपोर्ट करेंगे क्योंकि हम सबको पता है कि यह कांड घर के ही किसी सदस्य ने किया है । मैं अब तक यह पूछताछ इसलिए कर रहा था कि यदि किसी ने यह किया है तो खुलकर हमें बता दें । घर की बात घर में ही रह जाएगी । पुलिस रिपोर्ट हुई जैसा कि हम तुम्हारे बड़े भाई से पूछताछ करके करने वाले हैं तो पुलिस इस शहर के हर ए.टी.एम. का उस दिन का सी.सी.टी.वी. देखते ही तुरंत पता कर लेगी कि यह किसने किया है । तुम अपने बड़े भाई को फोन करो और जल्द से जल्द यहाॅं बुलाओ क्योंकि उसने अगर पैसे नहीं लिए होंगे तो मुझे पुलिस स्टेशन जाना पड़ेगा और इसकी रिपोर्ट दर्ज करवानी होगी । राज उस समय बैठक से उठकर अपने रूम में चला गया और करीब आधे घंटे बाद अपने बड़े भैया के पास आया और कहा कि बड़े भैया ! मेरे भैया ने पैसे नहीं लिए हैं । राज के बड़े भैया ने कहा कि जब उसने नहीं किया तो फिर किसने किया है ?? तुम्हें कुछ पता हो तो मुझे बताओ । इसके बाद राज ने जो राज़ खोला उसे सुनकर सबके होश उड़ गए । उसने बताया कि वह एक दिन अपने दोस्त का सैमसंग का फोन लाया था जो गलती से उससे गिर कर टूट गया । उसके दोस्त ने उससे कहा कि अब तुझे इसके पैसे देने होंगे इसीलिए मैं चाचा जी का ए.टी.एम. लेकर गया और पैसे निकाल कर अपने दोस्त को दे दिए । राज के बड़े भैया ने राज से पूछा कि तुम्हें ए.टी.एम. का पिन कोड कैसे पता चला और मोबाइल पर जो मैसेज आया था क्या तुमने ही डिलीट किया था ?? राज ने बताया कि चाचा जी ने पिन कोड अपनी डायरी में लिख कर रखी हुई है इसलिए मैं पिन कोड जानता था और यह भी जानता था कि चाचा जी अपना ए. टी. एम. अपनी पलंग के गद्दे के नीचे रखते हैं और दोपहर में चाचा जी के सोने के बाद मैं गया था और साथ में उनका मोबाइल भी लेकर गया था ताकि मैसेज डिलीट कर सकूं । पैसा निकालने के बाद जैसे ही मोबाइल पर मैसेज आया मैंने मैसेज डिलीट कर दिया ताकि चाचा जी उस मैसेज को पढ़ ना सके । घर में उस दिन कोई नहीं था । चाची जी छोटे भैया ( चाचाजी के छोटे बेटे ) के साथ डाॅक्टर के पास गई हुई थी और मेरे भैया के आने के बाद मैं बाहर गया था लेकिन मैंने ए.टी.एम. कार्ड उनके आने से पहले ही अपनी किताब में रख लिया था । घर में आने के बाद मौका मिलते ही मोबाइल फोन और ए.टी.एम. कार्ड मैंने उसकी जगह पर रख दिया था । सारी बातें सुनने के बाद राज के बड़े भैया ने कहा कि हमें तो तुम्हारे बड़े भाई पर शक था । तुम पर तो हमने शक किया भी नहीं था । राज ! तुम अपने चाचा जी से बात करते ।
राज ने कहा कि मुझे चाचा जी बस पिटते वो मुझे इतने पैसे कभी नहीं देते । राज के चाचा जी और चाची जी ने जब राज की बातें सुनी तो उन्होंने बस इतना ही कहा कि संस्कार देने में हमसे कहाॅं कमी हो गई ?? राज के बड़े भैया भी यह सोच रहे थे कि आजकल के बच्चों को मोबाइल की ऐसी लत लगती जा रही है कि वह इसे पाने के लिए कुछ भी करने को तैयार रहते हैं । राज के बड़े भैया को यह भी शक हुआ कि इसने हमें पैसे निकालने की बात जो बताई वह तो सही बताई लेकिन इसने जो मोबाइल रखा है वह भी तो मॅंहगा है । कही इसने उसी निकाले हुए पैसों से तो मोबाइल को नही खरीदा है ??
राज के बड़े भैया ने राज को प्यार और गुस्सा दोनों दिखाते हुए उसे समझाया और उससे वादा लिया कि भविष्य में वह कोई भी इस तरह का कांड नहीं करेगा । राज के बड़े भैया ने राज को समझा तो दिया और उसने वादा भी कर लिया लेकिन उनके मन में यह सवाल अटक गया था कि राज ने अपने ही घर में अपने ही चाचा के साथ यह सब किया जो एक चौदह साल का बच्चा तो कभी नहीं कर सकता है । चौदह साल के बच्चे का दिमाग इन मामलों में इतना तो डेवलप नहीं होता कि वह ऐसी प्लानिंग कर सके कि मुझे इसके बाद क्या - क्या और कैसे करना है??
क्या इसने यह सब मोबाइल से सीखा है या यह ग़लत संगत में पड़ गया है ??? इस राज ने गलती की है या गुनाह किया है ?? वैसे तो मैंने इसे इसकी गलती समझकर प्यार से समझाया है लेकिन क्या यह समझा भी हैं ?? राज के चाचा - चाची और उनके परिवार ने तो इसे उसकी गलती कर समझाया और भविष्य में ऐसी गलती दुबारा ना हो ऐसा वादा भी लिया लेकिन सभी के मन में यह सवाल अभी भी है और आगे भी रहेगा कि राज ने जो किया वह उसकी गलती थी या गुनाह ????
धन्यवाद 🙏🏻🙏🏻
" गुॅंजन कमल " 💗💞💓

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