माँ शब्द देखने में व पढ़ने में बहुत छोटा है
पर इस दुनिया में इससे बढ़ा कोई नहीं है
जो हर मुश्किल सह लेती है मुस्कुरा कर ज़िन्दगी में
इसीलिए दुनिया में माँ को पृथ्वी माना जाता है
कोई कितना भी जख्म दें माँ सिर्फ ममता लुटाती है
कोई कितना भी सताये इन्हे फिर भी माँ सिर्फ मुस्कुराती है
ना खुद टूटती है सितम से न अपने बच्चों को टूटने देती है
इसीलिए दुनिया में माँ को पृथ्वी माना जाता है
कितना मुश्किल सहकर हमें इस जहाँ में लाती है
कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता की कितना दर्द सहती है
फिर भी इनके होठों पर मुस्कान सजी रहती है हमारे लिए
इसीलिए दुनिया में माँ को सहन शीलता का देवी माना जाता है
कितने अभागे होते है वो लोग जो माँ की कद्र नहीं कर पाते है
जो एक औरत होकर भी पिता की हर फर्ज़ को भी निभाती है
जिसकी आँचल तले देवता भी सर रख सोये है सुकून से
इसीलिए दुनिया में माँ को पृथ्वी माना जाता है
धरती ही तो माँ जो इस जहाँ को बसाया है
सहा है हर जख्म होठों से उफ्फ तक न किया है
कभी साथ नहीं छोड़ती आपने बच्चों को मुश्किल में भी
सच में माँ से बढ़कर दोस्त इस जहाँ में किसने पाया है
कितना भी समान पाले हम इस दुनिया में
पर माँ का समान कर ले तो धरा पर ही स्वर्ग मिल जाए
जिसने ठुकराया है माता पिता को अपनी ज़िन्दगी में
उससे बढ़ा अधर्मी इस दुनिया में कहाँ मिलने वाला है
हर रिश्ते की अंत होजाए इस दुनिया में लेकिन
इस जहाँ में माँ का रिश्ता सबसे अनन्त है
जो कभी नहीं सुखती वो प्यार की सागर होती है माँ
इसीलिए तो दुनिया में माँ को पृथ्वी माना जाता है
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नैना... ✍️✍️🙏🙏🌹

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