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इतना यकीन है मुझे झूठा नहीं है प्यार तेरा
फिर भी कैसे कर लु अजनबी ऐतबार तेरा
आए हो बहार में कुछ पल ठहराव लिए
जाना तेरा लाज़मी है जो आने वाला है मौसम पतझड़ का

ये कैसे मान लु की तुम हरजाई नहीं हो
छोड़ कर जाओगे नहीं तुम मुझे चाहे जोभी हो
रुके हो साहिल पे तुम कुछ देर साथ निभाने
जाना तेरा लाज़मी है जो फ़ितरत है तुम्हे दरिया में मिल जाने का

माना किसी शहर का तू मोहब्बत से मारा है
प्यार का कुछ लम्हे चुराने पंछी परदेशी आया है
जब तक है मौसम बहार का रुके हो डाली पर हक जताये
जाना तेरा लाज़मी है जो आने वाला है मौसम पतझड़ का

कसम है तुम्हे आज़ाद परिंदे इतना चाहत जताया न करो
टूटना है जो कभी भी ऐसे वादेहमसे तुम किया न करो
चाहु रोकना भी तुम्हे तो रुक न सकोगे मेरे लिए
जाना तेरा लाज़मी है जो आने वाला है मौसम पतझड़ का

कर रहे हो गुस्ताखियाँ प्यार की कब तक इसे निभाओगे
कर लु एकरार मैं क्या हर मौसम में मुझसे मिलने आओगे
चाहत का अंजाम में देखी है नैना सिर्फ पल जुदाई की
जाना तेरा लाज़मी है जो आने वाला है मौसम पतझड़ का
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नैना...✍️✍️✍️