मेरा जीवन लोहे जैसा प्रभु। 
छूकर कंचन कर दो।। 
माया ममता  मुझे सतावे। 
इससे मूझे दूर कर दो।।
लगन लगे श्री चरणों में  ऐसी। 
अभय वरदान दे दो।। 
असा तृस्रा लगी गैर फाँसी। 
जगत उड़ाबे हाँसी।।
कहौं कहाँ लगि निज अधमाई। 
चरन वरन लीजे प्रभु।। 

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर
सरसी छंद में लिखने का प्रथम प्रयास मात्रा भार 16-11