अपने प्यार को हमेशा के लिए अपने ‌से दूर जाने का एहसास ,  वही समझ‌ सकता है जिसने टूट कर प्यार किया हों और सच्चा प्यार किया हों । जी हाॅं सच्चा प्यार । यह करने वाला  वह होता है जो किसी भी परिस्थिति में अपनी प्रेयसी या प्रेमी का  साथ देती या देता हैं । सच्चें प्यार करने वाले प्रेमी युगल एक - दूसरे के  दुख में साथ देते हैं और  एक-दूसरे की खुशियों को अपनी खुशियां मान कर जिंदगी में आगे बढ़ते हैं । सुजाॅय भी तों यही करने वाला था । अरण्या की खुशी उसके लिए अब अपनी खुशी से बढ़कर हों गई थी । वह चाहने लगा था कि अरण्या अपने पिता को  दिया वचन पूरा करें और  अपने सपनों को पूरा करने के लिए विदेश जाकर डाॅक्टरी की पढ़ाई करें और इसके लिए उसे क्या करना है ?  उसने यह भी सोच रखा था । 

' मेरा दिल तों कभी नहीं चाहेगा कि आप  मुझसे अलग हों लेकिन मैंने भी  प्रण किया है कि अपने प्यार को उसकी मंजिल पर पहुॅंचा कर ही दम लूंगा । इसके लिए जो कुछ भी करना पड़े करूंगा ।'    सुजाॅय ने अरण्या की तरफ देखते हुए कहा । 

' मैं समझी नहीं  आप क्या कहना चाह रहे है ?  मैं तो आपसे जाने की इजाजत माॅंग रही थी ताकि मैं जा सकूं ।' अरण्या ने भी सुजाॅय की तरफ देखते हुए कहा । 

' जी !  जरूर जाइए लेकिन जाने से पहले इतना तों बता दीजिए कि मैं आपको गाना कब सुनाऊं और हमारी तीसरी डेट कब होगी ?'    सुजाॅय ने मुस्कुरा कर अरण्या से कहा । 

' मैंने आपको पहले ही बता दिया है कि तीसरी डेट और आपके गाने पर मेरा नहीं बल्कि शिविका का हक बनता है और वही इसकी शुरुआत से हकदार है । मैं तो यूं ही खां-  मा - खां आप दोनों के बीच में आ गई थी । शिविका ही बता सकती है कि आपकी तीसरी डेट कब होगी ?' 
अरण्या ने सुजाॅय से कहा । 

' ठीक है फिर ! शिविका जी से ही पूछ लेता हूॅं । वैसे आपको मेरी तरफ से जाने की इजाजत है । आप कहें तो मैं आपको अस्पताल तक छोड़ सकता हूॅं । मुझे अपने दोस्त को डिस्चार्ज  कराने आपके अस्पताल ही तों जाना है ।'    सुजाॅय ने कहा । 

' जी शुक्रिया ! मैं जैसे यहाॅं आई थी वैसे  जा  भी  सकती हूॅं । आपको मेरे लिए तकलीफ उठाने की जरूरत नहीं ।' अरण्या ने मुस्कराते हुए कहा । 

' जी ! जैसी आपकी मर्जी ।'  सुजाॅय ने कहा । 

अरण्या और सुजाॅय दोनों ही रेस्टोरेंट से साथ  में ही निकले । अरण्या जहाॅं ऑटो में बैठ कर अस्पताल जाने के लिए निकल पड़ी वही सुजाॅय अपनी गाड़ी में बैठ कर अरण्या को जाते हुए देखता रहा । 

' मैं सही था ! तुममें स्वाभिमान भी है और मैं दिल से चाहता हूॅं कि तुम्हें तुम्हारी मंजिल मिलें ।'  सुजाॅय ने खुद से कहा और मुस्कुराते हुए गाड़ी आगे बढ़ा दी । 

' इसका फोन‌ स्विच ऑफ क्यों आ रहा है ?  एक बार तों फुल रिंग हुई थी उसके बाद स्विच ऑफ ?'    शिविका ने गुस्से में अपना फोन बेड पर फेंक दिया । 

फोन बेड पर गिरते ही बजने लगा । फ़ोन की तरफ तेजी से जाकर शिविका ने फोन‌ उठाया । 

' हलो अरू  ! तुम्हारा फोन स्विच ऑफ क्यों था ?'  शिविका ने पूछा । 

' अस्पताल से लगातार फोन आ रहे थे और मैं डेट पर थी तों इसकारण मैंने फोन को  स्विच ऑफ कर दिया था ।' अरण्या ने कहा । 

' ओ. के.  !  वह शादी के लिए मना तो कर देगा ना ?'  
शिविका ने जल्द ही मुद्दे पर आते हुए कहा । 

' आई  होप सो ।  मैं तुम्हें गारंटी तों नहीं दे सकती लेकिन मुझे लगता है वह शादी के लिए इंकार कर देगा ।'  अरण्या ने सच्चाई छुपाते हुए कहा । 

' एक मिनट अरू ! कोई मैसेज आया है । हो सकता है उसी का हो । तुम होल्ड करों । मैं मैसेज देख कर तुमसे बात करती हूॅं ।'  शिविका ने कहा । 

शिविका मैसेज देखने लगी । मैसेज सुजाॅय का ही था जिसने लिखा था कि आपने और आपकी दोस्त दोनों ने मिलकर मेरे दिल के साथ खेला है और आपने इस रिश्ते की शुरुआत ही झूठ के साथ की हैैं तो हमारी शादी की इमारत इस झूठे नींव पर कैसे टिक सकती है  इसलिए मैं इस शादी से इंकार करता हूॅं लेकिन मेरी एक शर्त है कि यह बात आप और आपके पापा मेरे डैडी से नहीं कहेंगे । मेरे डैडी को कभी भी  पता नहीं चलना चाहिए कि मैंने शादी से इंकार किया है । 

शादी से इंकार पढ़ते ही शिविका उछल पड़ी । उसने अरण्या से  फोन पर कहा :- " यार ! तूने तो कमाल ही कर दिया । उसने तुरंत ही शादी करने से इंकार कर दिया । मैं अभी तुम्हें पैसे भेजती हूॅं । जल्दी से विदेश जाकर डाॅक्टरी की पढ़ाई पूरी कर और अपने सपने को पूरा कर डाॅक्टर बन‌ जा । 

शिविका ने उसी वक्त अरण्या के अकाउंट पर पैसे भेज दिए और अरण्या ने भी तत्काल  ही विदेश जाने की पूरी प्रक्रिया शुरू कर दी । दोनों बहुत खुश थी और अपने - अपने सपने को  जागती ऑंखो से पूरा होते हुए देख  रही थी ।  

क्रमशः 


" गुॅंजन कमल " 💗💞💓