एक दिन कुछ सोचते हुए,
पत्नी जी बोली,"सुनिये तो",
हमने भी थोड़ा डरते-सहमते
कह ही दिया,"अजी,कहिये तो",
"क्या आपको याद हैं जी
सात फेरों के सात वचन,"
सिर को "ना" में हिला तो दिया,
पर घबरा गया मैं मन ही मन,
"अठरा बरस हुए शादी के,
कई चीजें हुई आउटडेटेड,
क्यूं न अब हम कर लें,
सात वचनों को अपडेट"
"कैसी बातें करती हो,
शादी नही कोई मोबाईल ऍप्लिकेशन,
कभी सुना भी है सात वचनों का,
होता अपडेटेड वर्जन"🙄
जो आँखें दिखाई मेडम ने,
तो हमने पारी बदली,
"मेरी जान,तुम्हारी कल्पना अतुल,
तुम कवियित्री जो ठहरी"
अपनी खुशामद सुनकर के,
पत्नीजी हो गई ग्लेड ,
"सात वचन को छोड़ो,
जब हम तुम ही हो गए अपडेट"
जीवन के सफर की हर मुश्किल में,
एक दूजे का साथ निभाया,
कभी लड़कर,कभी प्यार से
इक दूजे को समझा,समझाया
हमने भी कहा,"अजी, डोंट वरी,
आगे भी करेंगे एडजस्ट,
जब जब जरूरत होगी,
हम खुद को करेंगे अपडेट।
✍🏻प्रीति ताम्रकार
जबलपुर(मप्र)

0 टिप्पणियाँ