भर आता आँखों में नीर.......।
जब हुई थी पहली मुलाकात
समझते थे बिन बोले जज्बात
अब दिल में क्यों है शिकवों की भीड़
कैसे कहूँ में मन की पीड़
भर आता आँखों में नीर...........।
तुमने कहा मैं बदल गयी,
मैं तो बस तेरे अनुरूप ढल गयी
मेरा भी था अपना एक वजूद
जो आया याद तो थोड़ा सा मैं सँभल गयी
तुम कहते थे मुझको हीर
फिर क्यों है अब शिकवों की भीड़
कैसे कहूँ मैं मन की पीड़
भर आता आँखों में नीर.........।
ऋचा कर्ण✍✍✍

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