कौशल्या देवी को एहसास होता है कि पीहू अंदर से बहुत दुखी है।लेकिन वो अभी नीरज के सामने खामोश रहती है।अब पीहू को भी तसल्ली है कि चलो कोई तो है जो हर पल उसके साथ रहेगा।इस तरह सारा दिन आराम से कट जाता है और नीरज भी घर ही होता है तो पीहू माँ से कोई बात नही कर पाती है।

अगले दिन नीरज ऑफिस चला जाता है और आज कौशल्या को मौका मिल ही जाता है पीहू से बात करने का।पीहू अपने कमरे में आराम कर रही है और कौशल्या आकर उसके पास बैठ जाती है।वो पीहू से पूछती है बेटी देखो मुझे अपनी सास नही माँ ही समझो और जो भी तुम्हारे मन मे परेशानी है वो सच-सच बता दो।

पीहू अपनी सास के गले लगकर रोने लगती है और कहती है माँ ये जो बच्चा है ना.....

अभी वो इतना ही कह पाई थी कि दरवाजे की घँटी बजती है और कौशल्या कहती है तू बैठ मैं देखती हूँ कौन है।

कौशल्या के जाते ही छाया पीहू के सामने आती है और गर्दन पकड़ कर कहती है अगर तूने उस बुढ़िया को मेरे बच्चे के बारे में कुछ भी बताया तो मैं उस बुढ़िया का वो हश्र करुँगी जिसकी तूने कल्पना भी नही की होगी।जान से मार दूँगी तेरी बुढ़िया को।

तभी कौशल्या वापिस आती है और कहती है कि दरवाजे पर तो कोई नही था ,अब बताओ क्या कह रही थी तुम?

कुछ नही माँ बस पहली बार माँ बन रही हूँ इसीलिए घबरा जाती हूँ।पीहू बात को दूसरी दिशा में घुमा देती है।

धत पगली,ये तो खुशी का मौका है,कोई परेशानी वाली बात थोड़े ही है।तू देखना जब समय आएगा तो हिम्मत भी ऊपर वाला ही देगा।

अब पीहू अपनी सास के गले लग कर कहती है “जी माँ”।

सामने छाया खड़ी मुस्कुरा रही है।

दूसरी ओर,कौशल्या भी मन मे सोच रही है “मैं भी तेरी माँ हूँ,जानती हूँ कि तू कुछ छुपा रही है”।

दिन में कौशल्या खाना बना रही है तो पीहू खाना लेने से मना कर देती है ये कहकर कि मन नही है।

कौशल्या के जाते ही छाया आकर उसका गला पकड़ लेती है तुझे मेरे बच्चे की जरा भी फिक्र नही है,जा जाकर खाना खा।

पीहू कह रही है छोड़ दो मुझे छाया,मुझे भूख नही लगी सचमे।

तभी वहाँ पर कौशल्या आ जाती है और वो देखती है कि पीहू के खुद के हाथ अपने ही गले पर है और वो चिल्ला रही है छोड़ दो मुझे।

कौशल्या को छाया नजर नही आती है और वो जाकर बहु के हाथ उसकी ही गर्दन से छुड़वाती है!क्या हुआ पीहू तुम ऐसे क्यों कर रही थी?कौशल्या पूछती है।

पीहू कहती है कुछ नही माँ जी बस कोई बुरा सपना देख लिया था शायद।

तुम भी बहुत अजीब हो कोई जागते हुए भी सपने देखता है क्या?ये कहकर वो पीहू को पानी पिलाती है।

कौशल्या एक बहुत समझदार बुजुर्ग औरत है और वो जानती है कि कोई बहुत बड़ी बात है जो पीहू छुपा रही है।उसे अब पीहू की चिंता सताने लगती है।

वो घर मे कुछ नकरात्मक ऊर्जा महसूस कर रही थी लेकिन कुछ कह नही पा रही थी।एक दिन उसने अपने कुलगुरु को फोन मिलाया और उनसे पीहू की दशा की बात की!छाया भो सामने बैठी सब सुन रही थी।कुलगुरु उसे कहते है कि ऐसे समय मे औरत का कोई धार्मिक पुस्तक पढ़ना बहुत अच्छा होता है।तुम भी उसे रामायण पढ़ने को कहो।

ठीक है गुरु जी ये आपने सही कहा,मैं आज ही नीरज से कहकर रामायण मगवा लेती हूँ क्योंकि घर पे तो है नही।कौशल्या खुश होकर कहती है।