कभी रंजो अलम के गीत मैं गाया नही करता,,,
कभी रंजो अलम के गीत मैं गाया नही करता
सब्र करता हु,आपने दिल को तड़पाया नही करता
बुरे देखूँ भले देखूँ बुराई भी भलाई भी
किसी चक्कर मे पड़ करके मैं चकराया नही करता

मुझे मालूम है यह चार दिन का मौज मेला है
न खुद मैं तड़पा करता हु और तड़पाया नही करता 
मैं ये भी जनता हु मुझको जनत मिल नही सकती
इसी से मैं कभी दोज़ख को ठुकराया नही करता

खुशामद चापलूसी की नही आदत रही अपनी
गलत बाते किसी को भी मैं, समझाया नही करता
मुक़दर में लिखा जो है मिलेंगे देखना हम को
मुझे जो कुछ भी मिल जाये,मैं ठुकराया नही करता

सुना है दूध की नदियाँ बाहा करती है जन्न्त में 
मगर वो दूध इस दुनिया मे काम नही आती है
मुझे जन्न्त की बुढ़ी हुरो से यारो है क्या लेना
बजारे हुस्न इस दुनियां में सजवाया नही करता

नही आब नेमतों की आरजू, बाकी रही कोई 
हु गुरबत में पला मजदूर ललचाया नही करता
घुटन महसूस करता हु, मैं जन्न्त के तसव्वुर से
औ दोज़ख़ के तसव्वुर से, मैं घबराया नही करता 
 
💐💐💐💐 प्रीतम वर्मा 💐💐💐💐💐💐💐