सूर्य ऊर्जा से चलायमान जग,
बहु रंगी जग की माया।
नदिया बहती कलष कल,छल छल
अन गिनत लहरों संग संग।
कितने रंग जल में दिखते हैं पर
वह तो पारदर्शी ठहरा।
हर रंगों के रंग में ढलता पर अपनी
फितरत कभी न बदलता ।
वृक्षो के पत्तों की हरियाली रूप
नीड़ सजाते पक्षी उन पर।
आसमान की छत्र छाया में सभी
धरती के सम्मुख रहते।।
कितनी रंग बिरंगी दुनिया में
सभी हिल मिल कर रहते हैं।।
-----अनिता शर्मा झाँसी
----मौलिक रचना