इस रंज ओ गम की  दुनिया में खुशियों का ठिकाना कहाँ है 
दर्द का विशाल महासागर है खिलखिलाने का बहाना कहाँ है 
एक तू ही है प्रभु जहाँ मिलता है सुकून हर आम ओ रसूख को 
तेरे दरबार के सिवा "सांवरिया" ये बेशकीमती खजाना कहाँ है 
हरिशंकर गोयल "हरि"