ये जो हवाओं की
सरसराहटे  हैं
इनके संग मंद- मंद
तेरी यादें भी
चली आती हैं।
शांत सा दिल
रहता है मेरा
ये तूफ़ान मचा
जाती हैं।
ये तो आकर
चली जाती हैं
निशां तबाही के
छोड़ जाती हैं।
गवाह जिनकी
आँखे होती हैं।
इस पर भी
इल्जाम कि
मैं जुल्म
नही करता।
उनकी तो
बेरुखी और खामोशी
ही हमें
मार जाती हैं।
गरिमा राकेश गौत्तम
कोटा राजस्थान