"निलिमा, निलिमा देखा न्यूज़ में, कल किसान अंदोलन में दुर्घटना घट गयी, तेरा पति भी तो गया था! 
मुन्नी के मुहं में दूध की बाॅटल  देते निलिमा के हाथ कांप गये"
कल से माधव आया नही था! 
रात भर नींद नही आयी उसे, बुरे बुरे ख्याल, आते रहे, मुन्नी भी जाने क्यू रोती रही, हा काकी आती हूँ,! 
कमला काकी अभी भी इंतजार कर रही थी! दरवाजे के बाहर"
दरवाजे की कुंडी कुछ टाईट हो गयी थी! बरिश की वजह से "
दरवाजा खुलते ही काकी अंदर आ गयी! 
टी वी चालू कर, हा जैसे अभी निलिमा को होश आया! 
जो कुछ चल रहा था, वो सीन देख निलिमा, के होश उड गये, हर ओर खून ही खून बिखरा था! 
चार में एक नाम माधव का भी उसके कानो में गूंज रहा था! 
माधव रस्तोगी, जो इस दुर्घटना के शिकार हुए, उन्हें पैतालीस लाख मुवावजा, और परिवार में एक सदस्य की नौकरी, 
माधव का चेहरा उसे नजर आ रहा था, बाकी आंखों के सामने धुधंला सा अवरण छा गया! 
निलिमा निलिमा """ बस काकी की आवाज हल्की सी सुनाई दे रही थी! 
निलिमा ने आंखे खोलो, मुन्नी की जोर जोर से रोने की आवाज आ रही थी! बहुत शोर हो रहा था! 
पूरा गाँव इकट्ठा हो गया था! माँ उसके पास बैठी थी! 
सास ससुर, सभी उसके आसपास घेरा बनाकर बैठे थे! 
बिटिया "माँ कुछ न बोल पायी , और हिचकियों से पूरा घर गमगीन हो गया! 
निलिमा को बाहर लाया गया"
सफेट पोटली में माधव "नही ये मेरा माधव नही, घर की ओर वापस भागी निलिमा"
एक बार अखिरी दर्शन कर लो, भाभी बोली "
उनकी बातों में गम हिलोरें ले रहा था! 
पर निलिमा बाहर न आयी! 
सारे रीति रिवाज निपटा कर सब अपने घर चले गये! 
पर निलिमा मौन थी! 
तेरहवीं के दिन सब कार्यक्रम निपटा कर बैठे थे! 
की बडे जेठ निलिमा के बाबू जी के पास पहुंचे, चाचा जी आप निलिमा को अपने साथ लेकर जाना "
बाबू जी ने हा कर दिया "
अगले दिन निलिमा बाबू जी के साथ घर आ गयी! 
समय के साथ उसने मुन्नी में अपना मन लगा लिया पर माधव को हरपल महसूस किया! 
सुबह आंख खुली तो, निलिमा के ससुराल वालों और मायके वालों में तानातानी चल रही थी! 
वजह माधव के मुवायजे की थी! 
अपनी बेटी अपने घर रखिए, हमे मुन्नी दे दिजिए "
जेठ की ऊंची आवाज गूंजी, 
पैसे खाने के फिराक में हो, मेरी बहन के हम सब समझते है! 
निलिमा को भाई की आवाज सुनाई दी"
निलिमा बाथरूम में गयी! 
हाथ मुहं धोकर बाहर आयी! मुन्नी को गोद में उठाया "और सबके बीच खडी हो गयी! 
अब तक बात काफी बढ़ चुकी थी! सब एक दूसरे पर आरोप लगा रहे थे! 
अब आप लोग चुप हो जाईए, ये सब तामाशा क्यूं, मेरा माधव तो चला गया! पर हम अभी जिंदा है! 
आप लोग चिंता न करे हम माँ बेटी किसी पर बोझ नही बनेगें, 
सब ओर सन्नाटा छा गया! 
सब निलिमा का धैर्य " निर्णय सुनकर निशब्द हो गये!! 
दृढ संकल्प के साथ निलिमा, मुन्नी के साथ माधव के घर की ओर मुड गयी! 
समाप्त "
श्रीमती रीमा महेंद्र ठाकुर "वरिष्ठ लेखिका, संपादक"
रानापुर झाबुआ मध्यप्रदेश भारत