मेरे दिल का सुकून और मेरी सपनो की रानी है
चाँद से भी हँसी चेहरा मेरे महबूब सबसे प्यारी है
कलियों सी खिलतीं हुस्न उनकी करती हमें मदहोश
थोड़ी सी बेरहम सनम मेरी वो बड़ी नांदान है

जहाँ भूल जाता हूँ ज़ब वो सामने से गुज़रती है
हर पल चाहत उसके लिए इस दिल में सुलगती है
जाने कैसी नशा उनकी यादों से होने लगती है
थोड़ी सी बेरहम सनम मेरी बड़ी नांदान है

नागिन सी चाल चलती कोयल सी चहकती है
जिस राह से होके गुज़रे वो राह खुश्बूओ से महकती है
जान निसार करते है उनपे जो हुस्न की महारानी है
थोड़ी सी बेरहम सनम मेरी बड़ी नांदान है

खुले जो घने ज़ुल्फ उनकी काली बादल छाजाये
मुस्कुराये जो खिलकर बेमौसम बरसात होजाए
फूलो से भी नाजुक होंठ लगती कोई मधुशाला है
थोड़ी सी बेरहम सनम मेरी वो बड़ी नांदान है

सोचता हूँ कभी कहु उनसे मेरे दिल में जो बात है
कदम रुक जाते है खुद पे खुद जाने कैसी ये राज़ है
दुनिया की इस रंगी भीड़ में जो प्रीतम के दिल चुरा लिया है
थोड़ी सी बेरहम सनम मेरी वो बड़ी नांदान है.....!!
स्वरचित....
प्रीतम.... ✍️✍️✍️✍️