चाहे रोज़ तू बनना बिगड़ना आज उनका ये फरमाइश है
आज रात सुहानी है मेरे चाँद सी दिलरुबा के नाम की
दिल बेचैन हो उड़ चला है जो सनम मेरे इंतज़ार में है
जो फूलो से भी प्यारा चेहरा पखुडियो से भी नाजुक है
कैसे बेझ दिया धरती पर सोच खुदा को होता ताजुब है
छुप जाए बादल में वो चाँद शरमा के देख मुखड़ा मेरे चाँद की
आया है पैगाम अब दिल रुकता नहीं जो सनम मेरे इंतज़ार में है
पहली बार सजी है वो दिलबर मेरे नाम की श्रृंगार में
हाथो में मेहंदी महक रही होंगी अपने प्रीतम की नाम के
शोर मचाती पायल पाव की हाथो की कंगन पास बुलाती है
दिल बेचैन हो उड़ चला है जो सनम मेरे इंतज़ार में है
होठों पे मुस्कान हँसी आँखों में हया लिए वो इंतज़ार में है
सोलह श्रृंगार में लग रही दुल्हन वो चाँद मेरी करवा चौथ में
कश्मकश में दिल है मेरा क्या लेजाऊ सनम के लिए उपहार
दिल बेचैन हो उड़ चला है जो सनम मेरे इंतज़ार में है
ऐ चाँद ज़रा जल्दी आना कभी मेरे मासूम सनम मुरझाये ना
डर है कही देख मेरे चाँद को तू बादल में कही छुप जाये ना
सबको है इंतज़ार उस चाँद का पर उन्हें है मेरा इंतज़ार
दिल बेचैन हो उड़ चला है जो सनम मेरे अपने प्रीतम के इंतज़ार में है
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺प्रितम वर्मा💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖💖✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

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