बेटियों को क्यों नही मिल पाया
कभी अपना घर ?
बचपन जहाँ गुजरा वो
तो था माँ बाप का घर ?
जब माँ बाप ने ही नही दिया अधिकार
इस घर को अपना घर कहने का तो ?
 
बेटियां जायें किधर ?

बचपन से ही संस्कार दिये जाते
तरह तरह के ...
बेटियों को जाना  है ..
पराये घर ?

काश ! इन रीतियों को बनाने वालो ने 
एक बार सोचा होता !!
जिस घर मे बेटी का जन्म हुआ
उस घर को अपना घर कहने का अधिकार नही ?

पराये घर कोअपना कहने का अधिकार
 कोई देगा क्यो  ?

ससुराल मे आकर तन, मन से संवारती है घर !
 
 परन्तु जब भी...
किसी कारण से नाराजगी दिखाई जाती
कहा जाता भेज दो इसे इसके घर ?

आज भी प्रश्न  है ?

कहाँ है वो घर ?
जिसे पूरे अधिकार से
बेटियां भी कह सके ।
यह है हमारा घर  ।  !!!!!
✍🏼 रानी सिंह

मौलिक रचना