अब कोई मलाल न रही
ज़ालिम रुसवाई का मुझे
न रहा अब यकीं कोई
तेरे इस फरेबी चाहत पे
जहाँ तक करना था मनमानी
तूने कर लिया अब और नहीं
अब तुभी देखेगा क्या हूँ मैं
माना मजबूर थीं दिल से
पर उतना भी कमजोर
मैं कोई खिलौना नहीं हूँ
जो तू अपनी मर्ज़ी कर लेगा
मूड कर भी न देखु तुम्हे
मेरी नफरत अब तू देखेगा
जितनी मनानी है खुशियाँ
जी खोलकर जश्न मनाओ मेरा दिल टूटने का
कम हो गर वो खुशी भी
तो मुझसे कहना
बाकि है हँसी होठों पर वो देदूगी
मुझे भी खुशी है तेरे दुनिया बसने का
मत चुरा नज़रे हमसे
बेवफाओ की ऐसी फितरत नहीं होती
शौख से सजाओ महफिल अपनी
अब कोई गम नहीं तेरा किसी और के होने का
वो दिन कुछ और था जो
परायों के होठों से
तेरा नाम सुनना भी गवारा था मुझे
लेकिन अब वो ज़माना न रहा
जो तुम्हे देख गैरों साथ नैना की जिया जलेगा...!!
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नैना.... ✍️✍️✍️

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