वह रात बड़ी भयावह थी, सघन वन, आकाश में छाए काले मेघ, उनसे होती घनघोर वर्षा और साथ में तेज चलती आँधी वातावरण को और भी भयानक बना रहे थे। रह-रहकर बिजली भी चमक रही थी।
बिजली जब चमकती थी तो पूरा क्षेत्र कुछ पल के लिए प्रकाशवान हो जाता था, इस प्रकाश में एक व्यक्ति झाड़ियों के मध्य दौड़ता हुआ दिखाई दिया; उसके ठीक पीछे लगभग २०० मीटर की दूरी पर पाँच सशस्त्र लोग भी उनके हाथ में एके राइफल की चाइनीज कॉपी एके-५६ थीं। राइफल में लगी फ्लैशलाइट के भरोसे ये लोग उस व्यक्ति का पीछा कर रहे थे।
बिजली के प्रकाश के सहारे वह व्यक्ति आखिर कब तक भागता, उसे स्वयं को बचाने के लिए कोई उपाय करना चाहिए। जो कि उसने किया, जंगल में ऐसे बहुत से गड्ढे तब जो बारिश के पानी से भर गए थे ऐसे ही किसी एक गड्ढे में वह व्यक्ति लेट गया। चूँकि उसका पीछा कर रहे लोग उसे ऐसा करते हुए नहीं देख पाए इसीलिए वे इस गड्ढे को पार करके चले गए।
थोड़ी दूर आगे जाकर जब वह दिखाई नहीं दिया तो पीछा करने वालों में से एक ने अपने साथियों से पूछा, "कहाँ गया वह तुममें से किसी ने देखा क्या?"
उसके साथी भी तो उसके साथ ही दौड़ रहे थे तो वे क्या बताते, "पता नहीं वह कहाँ गया? अभी तो हमारे सामने ही था।"
" एक काम करते हैं अलग-अलग दिशाओं में जाकर उसे ढूँढते हैं, किसी भी स्थिति में वह सीमा पार करके भारत नहीं पहुँचना चाहिए।"
"चिंता मत करो वह इस समय सीमा से बहुत दूर है, भारत पहुँचने के पहले ही हम उसे धर दबोचेंगे।"
आपस में मंत्रणा करके कि कौन किस ओर जाकर उसे खोजेगा, वे सभी अलग हो गए।
ऐसा करके उन्होंने बहुत बड़ी गलती कर दी, अब इसका खामियाजा उन्हें अपने प्राण देकर भुगतना होगा। जो व्यक्ति अब से कुछ समय पहले तक इनसे बचकर भाग रहा था अब वही इन सबको एक-एक कर मारने लगा। यदि वे एक साथ होते तो ऐसा होना कठिन था।
सबसे पहले वह उसी गड्ढे के पास की झाड़ियों को खंगाल रहे व्यक्ति के पीछे गया। दबे पाँव आगे बढ़ते हुए उसने अचानक हमला कर दिया। उसने अपने दाहिने हाथ से उसका बंद किया था ताकि वह चिल्ला कर किसी को सहायता के लिए न बुला सके और बाएँ हाथ से सिर पकड़ रखा था।
कुछ देर तक दोनों में संघर्ष चलता रहा एक स्वयं को बचाने का प्रयास कर रहा था तो दूसरा अपने शत्रु को मार देना चाहता था। इस संघर्ष का अंत एक कड़ाक की ध्वनि से हुआ, भागने वाले ने अपने हाथों से पीछा करने वाले के सिर को इतना जोर से घुमाया कि उसके गले की हड्डी टूट गई।
फिर वह दूसरी जगह जाकर एक पेड़ के पीछे छिप गया, उसे खोजता हुआ एक व्यक्ति इसी ओर आ रहा था। जब वह पेड़ के निकट आया तो भागने वाले ने उसे पेड़ के पीछे खींच लिया और उसके हृदय में चाकू घुसा दिया जो उसने पहले वाले को मारकर लिया था। थोड़ी देर तक तड़पने के बाद उसका शरीर शांत हो गया।
अब बचे तीनों व्यक्तियों को भी उसने कुछ इसी प्रकार से मार दिया। एक की गर्दन में चाकू घुसाया तो दूसरे की पीठ के पीछे से जाकर उसके पेट पर इतने वार किए कि अधिक मात्रा में खून बह जाने के कारण उसकी मृत्यु हो गई और तीसरे व्यक्ति को तो उसने चाकू फेंक कर मारा, अंधेरे में कुछ दिख तो नहीं रहा था फिर भी उसने अंदाजा लगाकर चाकू फेंका था जो सीधा उसके छाती पर लगा।
पाँचो को मारने के बाद उसने उनके शवों को जंगल में यहाँ-वहाँ बिखेर दिया और उनके हथियार ले लिए। फिर वह एक पेड़ पर चढ़कर छिप गया। उसे मालूम था कि उसे पकड़ने के लिए और लोग भी आते ही होंगे।
उसने एकदम सही अनुमान लगाया था। जिन लोगों को उसने मारा उनके साथी घटनास्थल के पास आ गए थे। ये लोग भी उसी का पीछा कर रहे थे। इस बार नौ लोग आए थे।
टोली का मुखिया सबके आगे चल रहा था उसे अपनी सर्च लाइट के प्रकाश में से देखा की एक पेड़ के नीचे ak-56 राइफल पड़ी हुई है। जब वह पास गया तो उसे थोड़ी ही दूर पर एक व्यक्ति औंधे मुँह लेटा हुआ दिखा।
यह उसी का एक साथी था, वेशभूषा से इसकी पुष्टि हो रही थी। मुखिया उसके पास गया और देखने लगा कि ये जीवित है या नहीं।
"यह तो मरा हुआ है उस …...", मुखिया ने अपने लोगों से कहा वह आगे कुछ और भी कहना चाहता था पर उसके शब्द मुँह में ही रह गए। उसने और बाकी सब ने भी देखा कि किसी ने उनकी ओर दो हैंड ग्रेनेड्स उछाल दिए हैं।
"भागोsssss", मुखिया अपनी पूरी शक्ति लगाकर चिल्लाया।
इनसे बचने के लिए वे लोग कहीं भागते इसके पहले ही उन ग्रेनेड्स में विस्फोट हो गया जिसके प्रभाव से सब के सब उछल कर दूर जा गिरे। चार लोग विस्फोट की जगह के बिल्कुल पास थे तो उन्हें इतनी अधिक चोटें आईं कि उनकी आत्माएँ तुरंत ही परलोक को चली गईं बाकी बचे पाँच, उन्हें भी चोट आई थी पर इतनी नहीं कि वे तुरंत ही संसार छोड़ देते शायद उनके भाग्य में थोड़ा और जीना लिखा था।
जंगल की गीली भूमि पर पड़े-पड़े वे कराह रहे थे तभी उनके सामने आ गया वह जिसका पीछा करते-करते वे यहाँ तक आए थे। आकाश में चमकती बिजली के मद्धम प्रकाश में उसका कीचड़ से सना शरीर दिखा, इस रूप में वह साक्षात यमदूत लग रहा था।
पुराणों में वर्णित यमदूतों के विपरीत इसके हाथ में पाश के स्थान पर असाल्ट राइफल थी जो उसने उनके साथियों से ही उधार ली थी। यह भी प्राणियों की आत्माओं को यमलोक भेजने का ही काम करती थी।
कुछ देर तक वह उन्हें कराहते हुए देखता रहा, शायद वह इसका मजा ले रहा था। फिर उस यमदूत ने राइफल का ट्रिगर दबा दिया। भारी वर्षा के बीच भी भूमि पर पड़े लोगों को राइफल की गर्जना स्पष्ट सुनाई दी। बर्स्ट मोड में पाँच बार गोलियाँ चली जिसके बाद उनके प्राण-पखेरू शरीर छोड़कर उड़ गए।
अब यहाँ रुकने का कोई औचित्य नहीं था इसीलिए यमदूत का वह रूप वहाँ से जाने लगा। किंतु इस घनघोर वर्षा में वह जाएगा कहाँ? उसे तो यह तक ज्ञात नहीं है कि इस समय वह है कहाँ और दूर-दूर तक कोई मानव बस्ती भी तो नहीं है, जहाँ से वह पता पूछ सके या रात बिताने के लिए आसरा पा सके।
तो वह फिर से उसी पेड़ पर चढ़ गया जिस पर वह अपना पीछा करने वालों से बचने के लिए छिपा था। उस पेड़ की घनी पत्तियाँ और मोटी-मोटी डालियाँ बूंदों की गति को धीमा कर दे रही थीं, कम से कम अब वह भीगने से तो बच रहा था।
अस्थाई आश्रय पाने और अपने शत्रुओं से पीछा छुड़ाने के बाद वह कुछ सोचने लगा शायद वह कल क्या करना है इसकी योजना बना रहा था। सोचते-सोचते वह कब सो गया उसे पता ही नहीं चला।
उसकी निद्रा भंग हुई भोजन ढूँढने निकले मकैक बंदरों की आवाज से। उन्हें देखकर उसकी भी भूख जग गई पिछले ३६ घण्टों से उसने कुछ भी नहीं खाया था।
बारिश अभी रात की तरह घनघोर नहीं पर रिमझिम अवश्य हो रही थी।
भोजन ढूँढते समय वह ध्यान से जंगल का निरीक्षण कर रहा था। पेड़ और जानवरों को देखकर वह समझ गया कि वह अभी मणिपुर-मिज़ोरम-काचिन वर्षावन में कहीं है, क्योंकि ऐसे जीव और वनस्पतियाँ केवल यहीं मिलती हैं।
अपनी स्थिति और अधिक स्पष्ट करने के लिए वह एक ऊँचे पेड़ पर चढ़ गया।
चारों ओर दृष्टि दौड़ाने पर उसे जंगल के बीच में एक खाली जगह जैसा कुछ दिखा जो काफी बड़ा था जिसे देखकर वह मुस्कुराया। लगता है वह जानता है कि यह क्या है।
पेड़ से उतर कर वह उस खाली जगह की ओर चल दिया। वह स्थान अधिक दूरी पर नहीं था फिर भी उसे लगभग दो घंटे तो लग ही गए।
यह एक नदी थी बहुत बड़ी, इस क्षेत्र में दो नदियाँ ही इतनी बड़ी हैं एक है इरावदी एवं दूसरी है चिन्द्विन नदी। ये दोनों ही उत्तर से दक्षिण दिशा की ओर बहती हैं।
अब तो उसे दिशा का ज्ञान भी हो गया था तो वह सीधा उत्तर दिशा की ओर चल दिया। परंतु भारत इस दिशा में तो नहीं है, क्या यह बात वह जानता है? जानता ही होगा उसे मालूम है कि वह क्या कर रहा है।
यह व्यक्ति कौन है उसका पीछा करने वाले लोग कौन हैं और वे इसका पीछा क्यों कर रहे थे?
इन सबके उत्तर मिलेंगे अगले भाग में, बने रहिए …..

0 टिप्पणियाँ