रोज़ गुजरते है उस मोड़ से
जहाँ मेरे दिल का क़ातिल बसते है
रोज़ मिलाती हूँ उस बेवफा से नज़रे
जिसने मेरी ज़िन्दगी विरान कर दी है.....!!
क्या गुनाह थीं मेरी यकीन करना
या ज़ुल्म था किसी से यूँ दिल लगाना
उसी के लिए क्यूँ तरसता है ये दिल
जिसने मेरी ज़िन्दगी विरान कर दी है.....!!
धड़कनो में आग कोई साँसो में जलन है
क्या दुनिया में दिल लगाने का यही अंजाम है
उसी का नाम क्यूँ आजाता है लबों पे भरी महफ़िल में
जिसने मेरी ज़िन्दगी विरान कर दी है.....!!
जान से भी चाहा जिसको उसीने दगा कर दी
कभी देखा भी नहीं मूड के की क्या हाल कर दी
वो ख़ुश है इतना गैरों के साथ की याद भी नहीं करता
जिसने मेरी ज़िन्दगी विरान कर दी है.....!!
होता गर खबर तो यूँ दिल का रोग न लेते
खोकर सुकून दिल का यूँ बेचैन न कभी होते
जाने क्यूँ भूल नहीं पाती नैना भूलकर भी अनजाने में
जिसने मेरी ज़िन्दगी विरान कर दी है.....!!
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नैना... ✍️💞

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