सपनों का संसार है तू या,
अधरो की मुस्कान है तू।
मेरे दिल का टुकड़ा है या,
मेरा ही पहचान है तू।।
आज़ जन्मदिन है तेरा,
खुशियों का नया सबेरा है।
तुम से बढ़कर इस दुनिया में,
कोई न दूजा मेरा है।।
अपनी पलकें खोलकर तुमने,
जिस दिन मुझे निहारा था,
मां की ममता जाग उठी थी,
तुम पर तन मन बारा था।।
जीने की एक आस जगी जब,
तुम ने पहला क़दम रखा।
जन्म दिवस पर आज तुम्हारी,
बनी हुई हूं, सखी सखा।।
एक वर्ष पूरे हुए मगर,
लगता है जैसे कल ही आए
पढ़ लिखकर तुम आगे बढ़ना,
तुम को देख कर ही हम मुस्काए।।
है दुआ मैं करती हूं हो ,
हर सपना अब साकार तेरा।
गम की बदली कभी न छाए,
महके अब किरदार तेरा।।
विजय रहो तुम जीवन पथ पर,
हर दुश्मन का नास करो।
लाख चुनौती हो जीवन में,
तुम पावन इतिहास करो।।"
अम्बिका झा ✍️

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