मत चाहो किसी को इतना कि उसे ख़ुद पर गुरुर हो जाये
फिर राह तको तुम उसकी और वो तुमसे दूर हो जाये!!
इंतज़ार करते -2 तुम थक जाओ उसका
लेकिन उसको तुम पर तरस न आये!!
करले वंदे तू खुद से प्यार इतना कि दिल न कोई तेरा तोड़ पाए
चाहत बन जा तू ख़ुद की ही की मन ही मन तू सबको भाए!!
कर निर्धारित एक लक्ष्य को जिससे तेरा भविष्य बन जाए
मत सोना तू चैन की नींद जब तक तुझे वो लक्ष्य हांसिल न जाए!!
मत पड़ इस दुनियादारी के मोह-मायाजाल में जिससे तू सिर्फ दुःख को पाए
जो तेरा है वो कहीं नही जाएगा और जो तेरा नही वो तुझे कहाँ से मिल जाये!!
कर्म का हिसाब सबको चुकाना पड़ता है यहाँ
जो जैसा बोयेगा वो वैसा ही तो पाये!!
पुण्य की गठरी बांध लें वंदे साथ तेरे बस वो ही जाये!!
मेरा-तेरा छोड़ यहीं पे इस धरा का सब यहीं धरा पर रह जाये!!
करले ख़ुद से प्यार तू वंदे कि तू सबके मनको भाए
अगले जनम तू क्या बने ये कौन जान पाए!!
एकता श्रीवास्तव ✍️

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