जीन्दगी में कोई, इश्क़ करता है जब
प्यार की आग में रोज जलता है तब

इश्क़ की आग में तुम ना जल पाओगे
बीच मझधार में डूब तुम जाओगे
छोड़ दो ये गुमान, ना  यू मजनूँ बनों 
प्यार के खेल में  हार तुम जाओगे

है अगर हौंसला, आके इजहार कर
ना छुपा इश्क़ को ,आके इकरार कर
तेरी मेरी कहानी ,अफसाना बने 
छोड़ दे शर्म को ,ना यू इनकार कर ।

आओ बैठो तुम्हे प्यार सिखला दू मैं 
सलीका प्रेम का आज बतलादू मैं 
जो है दिल में उसे तुम खुदा मान लो
ये इबादत  तुम्हे आओ सिखला दू मैं 

प्यार करने की कोई वजह तो नहीं 
है ख्वाहिश दिलों की सजा तो नहीं 
बेवजह लोग देते क्यूँ ताना हमे
दिल्लगी भी नहीं ,ये मजा तो नहीं 




कृष्णा की✍️ कलम से