विश्वास नहीं रखते किसी को झुकाने में  
वो क्या जाने कितना मजा है झुक जाने में 
विश्वास नही रखते किसी को रुलाने में
रोने वाला ही जाने कितना मजा आंसू बहाने में
विश्वास नहीं रखते किसी को जलाने में 
शम्मा क्या जाने कितना मजा है जल जाने में 
विश्वास नहीं रखते प्रीत कर पा जाने में 
प्रेमी ही जाने कितना मजा हैं निभाने में 
विश्वास नही रखते अकेले हँसने  खिलखिलाने में 
जोकर ही जाने कितना मजा ओरो को हंसाने में
विश्वास नहीं रखते हम खुद को महकाने में 
फूल जाने कितना मजा फिजाओं को महकाने में
विश्वास नही रखते किसी से माफ़ी मंगवाने में 
करने वाला जाने कितना मजा माफ़ कर देने में
नेहा धामा " विजेता " बागपत , उत्तर प्रदेश