✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
मन वीणा के तार सजा दे मात शारदे  इतनी कृपा कर।
स्वाँस स्वा़ँस झंकृत हो जाए मधुर स्वर भर।।
रोम रोम गुणगान करे हर क्षण प्रभु शरण में हम।। 
तन मन धन अर्पण सेवा में जीवन प्रेम भरा कर। 
शब्द सुमन अर्पित चरणों में कविता का वर दो।।

स्वरचित मौलिक अप्रकाशित सर्वाधिकार सुरक्षित डॉ आशा श्रीवास्तव जबलपुर