बाबुल की दहलीज पार कर बेटी,
जब नए जीवन में करती है प्रवेश......।

बहते हैं आँखों से आँसू ह्रदय में होता ,
है गम और खुशी का समावेश..…..।

ढल जाती है नए रिश्तों में,
होता है ये गुण बेटियों में विशेष.......।

बहुत याद आती है बाबुल तेरे आँगन की,
चिड़ियों सी चहकती तितली सी रंग बिखेरती थी
बाबुल तेरे आँगन में कुछ निशानी है मेरी
संभाल के रखना उसे बस यही है
मेरी यादों का अवशेष.................।
(स्वरचित )   ऋचा कर्ण😊🙏✍✍✍✍✍