बंधन खूबसूरत भी हैं और मजबूत भी, फर्क तो सिर्फ रिश्तों का होता है,मनचाहे रिश्तों से बनें तो तकदीर, और अनजाने रिश्तों से बनें तो मुकद्दर। एक ऐसा रिश्ता जो जज़्बात से जुड़ा है, मिलना बिछड़ना तो नसीब की बात है। ये वो बंधन हैं जो हमारी खुशी और चाहत के अहसास से जुड़े हैं। रिश्ते और बंधन एक सिक्के के दो पहलू हैं, कभी बंधन बनाते हुए रिश्ते बदल जाते हैं और कभी रिश्तों के साथ चलते हुए बंधन बदल जाते हैं। एक खूबसूरत रिश्ता हजार बंधनो से बेहतर है, इसलिए जिंदगी में हमेशा ऐसे बंधन चुनो जिनका रिश्ता हमेशा खूबसूरत हो, कोई टूटे तो उसे सजाना सिखों, कोई रूठे तो उसे मनाना सिखों, रिश्ते तो मिलते हैं मुकद्दर से, बस उन्हें खूबसूरती से निभाना सिखो।
प्रिया धामा

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