कैसा बँधन है तेरा मेरा
समझ नहीं पाती हूँ
जितना दूर जाना चाहती हूँ
खुद.को तेरे करीब पाती हूँ
अपने से ज्यादा तेरी फिक्र रहती है
हर बात मे तेरा ही जिक्र करती हूँ
प्यार मे परवाह है या.
परवाह मे प्यार है
ये भी समझ नही पाती हूँ
जब मुझे तुम दिखते नहीं हो
बैचेन हो जाती हूँ
मेरे दिल के नगमे तेरे ही गीत गाती है
क्यों गुनगुनाती है ,ये भी समझ नही पाती हूँ
तेरी यादे आकर मेरी तन्हाईयो मे सूकून दे जाती है
तेरा नाम लबो पर आते ही दिल की धड़कने
शोर मचाती है 
क्यों मचाती है शोर ,ये भी समझ नहीं पाती हूँँ
कोई ना समझेगा मेरे जज्बातो को
क्योंकि ये रिश्ता दिल से होते हुए रुह से जुड़ जाती है



शिल्पा मोदी✍️