मालिक ने रामू को घुड़की दी..!
बेबस रामू की नजर बार-बार टी.वी. पर पडती!
जहाँ बालीबाल वीनर बच्चों को सम्मानित किया जा रहा था..!
मेज साफ करने के बाद रामू ने सारे बर्तन साफ कर लिए और दिवाल घड़ी पर दृष्टि डाली..!
"अब तो मैं जा सकता हूँ..मालिक?" रामू ने सर झुकाए हुए कहा!
"हाँ, और सुबह टाइम से आ जाना..!"मालिक ने सख्त लहजे में कहा!
रामू बालीबाल का अच्छा प्लेयर था..! विगत वर्ष जब रामू फायनल में पहुंचा तब अरुण भाई ने कहा था.. रामू तुझे तो वीनर बनना है.. फिर रामू जी तोड़ परिश्रम कर के खेल में महारथ हासिल कर लिया..! अब उस दिन की प्रतीक्षा थी जब रामू वीनर बन कर अरुण भैया के गले लग जाएगा..! किन्तु विधाता को ये मंजूर नहीं था..! एन मौके पर अरुण भैया का एक्सीडेंट हो गया और रामू अर्श से फर्श पर आ गिरा.. ! अब रामू को अरुण भैया का ख्याल भी रखना था ..जिससे रामू फायनल गेम नहीं खेल सका.!
ए रामू! झा सर की ध्वनि सुन रामू की तंद्रा भंग हुई! रामू का उदास चेहरा देख सर ने अनेकों प्रश्न कर डाले!
"मैं अब नहीं खेल सकुंगा सर! मेरे अरुण भईया.. !"
रामू का गला भर आया.!
मैं बिल्कुल ठीक हूँ रामू! अरुण भईया को देख रामू चकित हो गया!
भईया आप चल सकते हैं? आपका एक्सीडेंट..?
अरे, नहीं पगले..!
कुछ लडके इर्ष्या दग्ध हो कर तुझपे हमला करने की योजना बना रहे थे.. झा सर ने एन मौके पर हमें सतर्क किया और हमने अपने प्लान के तहत तुझे रोक लिया..!
"हाँ बेटा! कोई आपका पद छीन सकता है, किन्तु आपकी प्रतिभा नहीं ले सकता!" अब तुझे जीतने से कोई रोक नहीं सकता है..! तुम कल से फिर गेम की प्रैक्टिस करोगे..!
झा सर! की बातें सुनकर रामू की आंखो से आंसू बहने लगे..! आज फिर से "उम्मीद की किरण "नजर आ रही थी!

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