जिंदगी में चुनौतियां बहुत है मगर.....
डगर मुश्किल भरी है।
सफर तो चुनौतियों भरा है मगर......
बढ़ते जाना बाधाओं से टकराकर।
मंजिल की राह का सफर
कब आसान होता है ?
एक और उम्मीद भर देती है........चाह
भर देती है नयी उमंग से।
जीवन बढ़ता जाता है अपने नये नये सफर पर।
जीवन चलायमान है अपने अंतिम पड़ाव की ओर।
-----अनिता शर्मा सुधा नर्सिग होम झाँसी
-----मौलिक रचना