आ गई सर्दियां , ठिठुरती हुई रातें
अब घूमेगा हर शख्स आग की तलाश में
मखमली बिस्तर पर सोएंगे कई लोग
ठिठुरेंगे कई लोग एक कंबल की आस में
कहीं लगेगी महफिलें गर्म हीटर के आस पास
तो कहीं दांत बजेंगे सर्दी से अधनंगे बच्चों के 
कहीं गर्म  ओवरकोट में टहलेंगे लोग पार्क में
तो केवल बनियान में कई लोग कचरा भी बिनेंगे 
कहीं दारू की दुकानें, बियर बार होंगे गुलजार 
तो कहीं फुटपाथ पर फांके करने को लाचार
कहीं गर्म शॉल ओढ़े हुए खिलखिलाती नारियां
कहीं भूख से बेहाल पहने फटी हुई साड़ियां
सर्द रातें हों, गर्म  लू हो, या हो भीगा सावन 
गरीबों के संघर्ष की परीक्षक है ये सब