मल्टी नेशनल कंपनी की दिल्ली शाखा के प्रमुख अजय भटनागर ने छोटी दीपावली को ही कार्य ग्रहण किया था । पूरे ऑफिस के स्टॉफ ने उनका जोरदार स्वागत किया था । उस स्वागत से अभिभूत हो गये थे भटनागर साहब । उनकी आंखें भीग गई थीं । 
अगले दिन दीपावली के अवसर पर विराट ने सोचा कि बॉस को दीपावली की शुभकामनाएं उनके घर जाकर देना ही ठीक रहेगा । उसने अपनी पत्नी सुलेखा से इस संबंध में विचार विमर्श किया । उसने भी यही कहा कि उनके घर जाकर दीपावली की शुभकामनाएं देना उचित होगा । इससे परिवार का परिचय भी हो जायेगा और त्यौहार भी साथ साथ मन जायेगा । दोनों ने तैयारी शुरू कर दी । 

विराट और सुलेखा दोनों चल पड़े । रास्ते में विराट ने दो बूके , मिठाई और कुछ पटाखे ले लिये थे । भारतीय परंपरा का निर्वाह भी तो करना था । बॉस के घर त्यौहार पर खाली हाथ कैसे जा सकते हैं ? 

बातों बातों में बॉस का घर आ गया । दोनों बड़े उत्साह से बॉस के घर के दरवाजे तक आये । घंटी बजाई । बॉस खुद आये और विराट तथा सुलेखा को देखकर चौंके । उनका चौंकना स्वाभाविक था ।एक दिन में ही तो पूरे स्टॉफ को नहीं जान सकते हैं न । विराट ने खुद का परिचय पहले दिया फिर सुलेखा का । उसके बाद उसने आने का प्रयोजन बताया । 

भटनागर साहब दोनों को अपने साथ अंदर लेकर आये और ड्राइंग रूम में बैठा दिया । उन्होंने अपनी पत्नी जया को आवाज देकर ड्राइंग रूम में बुलवा लिया । विराट और सुलेखा ने जया का अभिवादन किया और भटनागर साहब ने उनका परिचय करवाया । चारों लोग वहीं सोफे पर बैठ गये । 

दीपावली की शुभकामनाओं का आदान प्रदान हुआ और भटनागर साहब ने अपने ऑफिस की बात छेड़ दी । विराट को बड़ा अजीब सा लगा कि वह और उसकी पत्नी दीपावली के महापर्व पर उनसे मिलने आये हैं और बॉस ऑफिस की बातें कर रहे हैं । विराट ने फिर से दीपावली पर बात को केन्द्रित करते हुये कहा " इस बार तो बाजारों में बहुत रौनक है । पिछली बार तो कोरोना के कारण सन्नाटा था । लोगों के चेहरों पर उत्साह नजर आ रहा है" । 
" हां वो तो है । मगर आप तो यह बताइये कि अपने ऑफिस में कामचोर कौन कौन है" । 

विराट को फिर से बड़ा अजीब सा लगा जब फिर से ऑफिस की बात शुरू कर दी थी उन्होंने । उसने ऐसे दर्शाया जैसे उसने कुछ सुना ही नहीं हो । वह तो दीपावली के दीये , पटाखे और भी ऐसे ही विषयों पर बातचीत करने का प्रयास कर रहा था । 

इतनी देर में भटनागर साहब का पुत्र आ गया । विराट ने इशारे से उसे अपने पास बुलाया और मिठाइयों व आतिशबाजी का डिब्बा उसकी ओर बढ़ा दिया । उस डब्बे को देखकर वह लड़का एकदम से डर गया । उसके इस तरह के व्यवहार पर विराट और सुलेखा स्तब्ध रह गये । वह लड़का रोते हुये अंदर भाग गया । उसकी मम्मी जया उसके पीछे पीछे भागी । 

कमरे में एकदम सन्नाटा छा गया । भटनागर साहब ने उस सन्नाटे को तोड़ते हुये कहा 
"दरअसल रिषभ (उनका पुत्र) पटाखों से बहुत डरता है । ऐसा नहीं है कि वह पहले से डरता हो । दो वर्ष पहले एक मनहूस दीवाली उनके घर आई थी । उस दिन उनका परिवार कितना खुश था । लगता था कि भगवान ने सारी खुशियाँ उनके घर में ही भेज दी थीं । रिया (पुत्री) और रिषभ दोनों खूब मस्ती कर रहे थे । जया घर के काम काज में व्यस्त थी । शाम को रिया घर के कोने कोने में दीपक जला रही थी । रिषभ फुलझड़ी चला रहा था । जब रिया दीपक जला रही थी तब उसके पीछे ही रिषभ फुलझड़ी चला रहा था । अचानक रिषभ की फुलझड़ी से रिया के सूट के एक छोर में आग लग गई । जब तक हम संभल पाते रिया के सूट ने आग पकड़ ली । सिल्क का सूट था तो सलवार और कुर्ता दोनों जलकर उसके बदन से चिपक गये । हम लोग जब तक आग बुझाते तब तक रिया 40% तक जल चुकी थी । उसे लेकर हम अस्पताल भागे । दो महीने वह आई सी यू में रही । डॉक्टरों ने बहुत मेहनत की मगर उसे बचा नहीं पाये । बस, तब से ही रिषभ पटाखों से खौफ खाता है । वो मनहूस दीवाली हम कैसे भूल सकते हैं । उसके बाद इस घर में कभी दीवाली नहीं मनी " । 

विराट और सुलेखा दोनों अवाक होकर एक दूसरे को देखने लगे । 

हरिशंकर गोयल "हरि"