चाहे दिन हो खुशी का या राते हो चाँदनी की
कही भी नज़र नहीं आता एक बून्द रौशनी की
घिरी होती है इस तरह अंधेरों में ज़िन्दगी उनकी
जो चाह कर भी मुश्किल से पार नहीं पाती है
दिल रोना चाहे फिर भी रो नहीं पाता है
चाहकर भी किसी से हाले दिल कहाँ नहीं जाता है
कुछ इस तरह डूबती जाती है ज़िन्दगी गमो में उनकी
की जो चाह कर भी मुश्किल से पार नहीं पाती है
किसी से न कुछ कहना खुद में ही घुट घुट जिना
बहुत मुश्किल है इस जहाँ में एक स्त्री का जीवन होना
जिसके मुस्कुराहट पर भी सवाल उठ जाते है कयी दुनिया में
जो कभी वो सुकून से खुद के लिए मुस्कुरा भी नहीं पाती है
खुदके लिए नहीं पर दुनिया के लिए बहुत रस्मे निभानी होती है
बहुत शघर्ष से गुज़रती है जीवन उनकी जिस घर में बेटी होती है
क्यों आसान नहीं होता हर औरत की ज़िन्दगी इस दुनिया में
क्यों वो सही होकर भी नैना समाज में स्त्री ही गुन्हेगार मानी जाती है
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नैना... ✍️🙏

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