बस्ती में आवारा लड़के बैठे ताश खेल रहे थे।इमरान और अनीशा भी वहीं खड़े थे।तभी एक कार आ कर रुकी , उस कार में शहर की डीएम रानी रंधावा उतरीं।
बड़ी कार को देखने के लिए भीड़ लग गई।
उन्होंने बस्ती के बच्चों को इकट्ठा किया और बच्चों को संबोधित करते हुए बोलीं तुमलोग स्कूल जाते हो?
ज्यादातर बच्चे उनको ऐसे देख रहे थे जैसे कुछ अजूबा बोल दिया उन्होंने ,किशोर वय के लड़के धीरे से वहां से कट लिए।
बहुत कम बच्चे ही वहां रुके ।उन्होंने धनिया को देखकर पूछा क्यों बच्ची तुम्हारा क्या नाम है ?
धनिया _ उसने सहजता से कहा।
तुम बड़ी होकर क्या बनोगी ?रानी जी ने कहा।
नन्ही आंखों ने कभी सपने ही नहीं देखे थे ,न ही कुछ आगे का सोचा था।
उसने कहा_झाड़ू , पोछा जो मां करती है वही करूंगी।
कभी कभी मां ,मुझे लेकर काम पर जाती है।वहां भैया ,दीदी की बड़ी मोटी मोटी किताबें देख मुझे तो डर लगता है।
सब हंसने लगे।
रानी जी ने करीब करीब सभी बच्चों से यही सवाल पूछा लेकिन जवाब निल बटा सन्नाटा ही था। सभी अपने माता पिता के काम को ही आगे करना चाहते थे।
आखिर उनकी नजर इमरान और अनीशा पर पड़ी,उन्होंने उनसे पूछा क्या तुम लोग भी नहीं पढ़ना चाहते हो?
इमरान और अनीशा आगे आए ,उन्होंने कहा हम पढ़ना चाहते हैं, हमें पुलिस बनना था,इसलिए एक दिन हम पास वाले स्कूल गए थे।
हमने चहारदीवारी से देखा ,बच्चे खेल रहे थे,क्लास की घंटी बजी सब अंदर पढ़ने चले गए ,हम वहीं खड़े रहे ।जब दोपहर हुआ तो सबको खाना बांटा गया।हमें बहुत अच्छा लगा ,पढ़ना,खेलना और खाना ।कितना अच्छा होता कि हम भी स्कूल जाते हम दोनों आपस में सोचने लगे!!!
शाम को जब अब्बू ,अम्मी आए तो मैंने और अनीशा ने स्कूल जाने को कहा,तो अम्मी , अब्बू गुस्सा हो गए उन्होंने कहा दो अक्षर पढ़ लोगे तो कलेक्टर नहीं बन जाओगे।
इमरान की अम्मी कल से मैं इसे काम पर ले जाऊंगा और तुम अनीशा को_,अब्बू ने गुस्सा होते हुए कहा।
पर अब्बू हमें नहीं जाना गराज,इमरान बोला,और अनीशा भी बोल पड़ी और मुझे भी झाड़ू ,पोछा नहीं करना।
फिर पता नहीं रात को अम्मी ने क्या समझाया ,सुबह अब्बू ने कुछ नहीं कहा।
लेकिन इतना कहा था कि तुम दोनों स्कूल नहीं जाओगे।
लेकिन हमें लगता जैसे स्कूल हमें बुलाता था ,हम रुक नहीं पाते भाग कर अगले दिन स्कूल पहुंच गए ,लेकिन उस दिन हमने देखा कि मास्टर जी कुछ बच्चों को छड़ी से मार रहे थे ,कुछ को मुर्गा बनाए थे,शायद उन्होंने काम नहीं किया था इसलिए तब से हम डर गए।
अब हमें स्कूल नहीं जाना ,स्कूल में बच्चों को मारा जाता है।
रानी जी ने कहा ऐसा नहीं है बच्चे,जैसे कुम्हार मिट्टी से नए नए बर्तन ,मूर्ति गढ़ता है,उसी तरह प्यार ,अनुशासन से स्कूल में बच्चों को गढ़ा जाता है, ।
देखो बच्चों _मेरे घर वाले भी बहुत गरीब थे ,लेकिन उन्होंने शिक्षा का महत्व समझा ,और मुझे पढ़ाया मैं अंधेरे में मोमबत्ती जला कर पढ़ती थी।
मेरी मेहनत और किताब के भगवान ने मेरे सपने को पूरा किया।
उसके बाद वो जो पढ़ने के लिए उत्सुक थे उन बच्चों को अपने सरकारी निवास ले गईं ,वहां की भव्यता,नौकर ,गाड़ी देख सभी की आंखें चौंधिया गईं।
रानी जी ने सबके लिए जूस,बन _मक्खन,चॉकलेट आईसक्रीम मंगवाए ।
इमरान और अनीशा की आंखों में सपने तैर रहे थे ,उन्हें अब शिक्षा का महत्व समझ में आ रहा था।
उन्होंने कहा ,दीदी हमें भी स्कूल जाना है,लेकिन आपको हमारे अब्बू ,अम्मी को मनाना पड़ेगा।
रानी जी ने कहा जरूर ,कल मैं तुम्हारे घर आऊंगी , तुमलोगो के लिए एक नया सवेरा लेकर।
उसके बाद सभी बच्चों को ड्राइवर उनके छोड़ आया ।ज्यादातर बच्चों की आंखों में भविष्य के सपने अंगड़ाई ले रहे थे।
इमरान और अनीशा बहुत खुश थे,उनके अब्बू और अम्मी के पूछने पर भी उन्होंने नहीं बताया।
सुबह फिर से रानी रंधावा अपनी गार्ड ,पुलिस के साथ बस्ती पहुंची और इमरान के घर घुसी ,इमरान के घर के आगे भीड़ लग गई ,उन्होंने सभी माता पिता को शिक्षा का महत्व समझाया ।
आखिर इमरान के पिता सहित कुछ और बच्चों के माता पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने पर सहमत हो गए।
रानी रंधावा ने सभी का दाखिला सरकारी स्कूल में करवा दिया ,उन्हें यूनिफॉर्म ,जूते,बैग सब मिल गए ।
अब उन नन्ही नहीं आंखों में भी सपने थे ,भविष्य के ।

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