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अमानत है यह किसी की, इसको लूटने नहीं देना।
लहू से सींचा यह चमन, बर्बाद तुम होने नहीं देना ।।
अमानत है यह किसी की----------------।।



किसी की मांग का सिंदूर, किसी की गोद हुई खाली।
आयेगा उसका भाई कब, सजाने बहिन की डोली।।
चिराग है किसी घर का यह, इसको बुझने नहीं देना।अमानत है यह किसी की--------------।।
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(शेर)- बहुत मुश्किल है यारों, लहू से दास्तां लिखना।
       छोड़कर सुख महलों का, वतन पे जां फिदा करना।।
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उन्होंने देखा नहीं कभी,इसका अंजाम क्या होगा।
खुद को कुर्बान करने से, लाभ उनको क्या होगा।।
कर दिया हमको तो आबाद, भूला तुम यह नहीं देना।
अमानत है यह किसी की---------------।।
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(शेर)- कितना आसान है यारों, उनकी बरसी पे यह कहना।
         छोड़ेंगे वह नहीं राह, जिसपे वीरों का था चलना।।
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चले आये क्यों लुटेरे, सरहद को पार करके यहाँ।
खून क्यों बह रहा है, मजहब के नाम पर यहाँ ।।
मिटाना ख्वाब नहीं उनके, तिरंगा झुकने नहीं देना।
अमानत है यह किसी की-----------------।।




रचनाकार एवं लेखक- गुरुदीन वर्मा उर्फ जी.आज़ाद
जिला- बारां(राजस्थान)